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बिजली चोरों की अब खेर नहीं, ‘वी कनेक्ट’ एप से मिलेगा इनाम

मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का 'वी कनेक्ट' एप, सूचना देने पर सीधे खाते में आएगी प्रोत्साहन राशि। योजना रतलाम, मंदसौर, नीमच, उज्जैन और मालवा क्षेत्र के जागरूक नागरिकों को बिजली चोरी के खिलाफ आवाज उठाने का अवसर दे रही है।
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Tonk Electricity Theft Raid

अवैध कनेक्शन काटता कर्मचारी व इनसेट में मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी। फोटो: पत्रिका

रतलाम. मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली चोरी रोकने के लिए एक अपूर्व पहल की है। कंपनी ने 'वी कनेक्ट' नामक एक मोबाइल एप जारी किया है, जिसके माध्यम से नागरिक बिजली चोरी और उपयोग में अनियमितताओं की सूचना दे सकते हैं।

इन सूचनाओं की जांच के बाद सही पाए जाने पर सूचनादाताओं को पारितोषिक भी प्रदान किया जाएगा। कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह के निर्देश पर तैयार इस एप को डाउनलोड कर कोई भी उपभोक्ता या नागरिक बिजली चोरी, उपयोग में अनियमितता आदि की जानकारी दे सकता है।

बिजली चोरी के खिलाफ आवाज उठाने का अवसर
यह योजना रतलाम, मंदसौर, नीमच, उज्जैन और मालवा क्षेत्र के जागरूक नागरिकों को बिजली चोरी के खिलाफ आवाज उठाने का अवसर दे रही है। सूचनादाता को अपनी बैंकिंग डिटेल भी एप पर देनी होती है, ताकि सूचना सही पाए जाने पर प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी प्रक्रिया से जमा की जा सके। यह प्रोत्साहन राशि दस हजार या अधिक की आंकलित राशि वाले प्रकरणों पर ही देय होगी।

सूचना देने पर ऐसे मिलेगा तय पारितोषिक

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को कुछ ही दिनों में करीब तीस लोगों से बिजली चोरी व अनियमितता संबंधी सूचनाएं मिली हैं। कंपनी को उम्मीद है कि अब ऐसी सूचनाओं की संख्या में वृद्धि होगी। योजना के अंतर्गत गैर घरेलू भार वृद्धि, कृषि भार वृद्धि, स्वीकृत श्रेणी से अन्य उपयोग, अतिरिक्त परिसर में उपयोग, मीटर से छेड़छाड़, विच्छेदित कनेक्शन से अनाधिकृत उपयोग और गलत मीटर रीडिंग की सूचना पर तय पारितोषिक दिया जाएगा।

बिजली चोरी: एक बड़ी चुनौती
बिजली चोरी से वितरण कंपनियों को भारी वित्तीय हानि होती है, जिसका सीधा बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर पड़ता है। इससे बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है और राज्य के विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है। 'वी कनेक्ट' जैसे एप नागरिकों को इस समस्या से लडऩे में सीधे भागीदार बनाते हैं, जिससे न केवल राजस्व हानि कम होती है, बल्कि बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ती है।