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एक दिन एवो आवे कि हमे तमारा शहर मा आवीये

गूंजता रहा मुबारक मौला-मौला मुफद्दल मौला

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vikram ahirwar

Mar 04, 2016


रतलाम।
हमें रतलाम स्टेशन पर आया छे... मैं दुआ करू छूं के जल्द तमारा शहर मा आउ...अने इतमिनान से रहूं...रतलाम ना हजारों मुमनिन दीदारवास्ते हाजीर थया छे... एक दिन एवो आवे कि हमे तमारा शहर मा आवीये...आज जुमआ ना दिन मा मोह मदुल मुस्तफा (सअस) से दुआ करू छूं....खुदा आप सब ने आबाद शाद खुश ओ खुर्रम बाकि राखे। रोजी मा बरकत दे, एक ईमाम हुसैन ना गम ना सिवा कोई गम न दिखावे...या हुसैन...। कहकर मातम करवाया...ये शब्द है दाउदी बोहरा समाज के 53वें दाई सैयदना आली कदर मुफद्दल सैफुद्दीन भाई साहब के है। जिन्होंने शुक्रवार को रतलाम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म न बर 4 पर बने मंच से समाजजनों को संबोधित किया। आली कदर के दीदार के लिए पांच हजार से अधिक की सं या में रतलाम सहित अन्य जिलों से स्टेशन पर समाजजन पहुंचे थे। मुबारक मौला-मौला मुफद्दल मौला...मौला मौला मुफद्दल मौला...से पूरा परिसर गूंज रहा था। मौला करीब 22 मिनट रतलाम स्टेशन पर समाजजनों के मध्य रहे, इसके बाद बड़ोदरा के लिए रवाना हो गए। मौला के दीदार के लिए कोई व्हीलचेयर पर आ रहा था, किसी की आंखों से अश्रुधारा बह रही थी, हर कोई हाथ जोड़कर मौला मौला पुकार रहा था, ताकि एक नजर भर उन्हे मौला निहार ले...ये आलम समाज की एकता, अनुशासन और धर्मगुरु के प्रति प्रेम समर्पण की भावना सबकुछ बयां कर रहा था। इस अवसर पर समाज की आमील साहब शेख तय्यबभाई मदारवाला, शेख अली असगर भाई पूनावाला, जनाब मुल्ला हुसैन भाई की उपस्थिति में स्टेशन पर अंजुमन कलीमी जमात, अंजुमन बुरहानी जमात, बुरहानी गार्ड, शबाब कमेटी ने सारी व्यवस्था संभाल रखी थी। रतलाम सहित जावरा, सैलाना, ताल, नामली, बडऩगर, बदनावर, धार, मेघनगर, सैलाना, पेटलावद और बड़ौदा आदि स्थानों से भी बड़ी सं या में समाजजन रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर सैय्यदना साहब का दीदार किया।


रेलवे स्टेशन पर पल-पल की नजर

10.59 बजे ट्रेन रतलाम पहुंची।

11.04 बजे आली कदर कोच से बाहर आए।

11.06 बजे रेंप पर चलकर सभी से मिले।

11.11 बजे मंच पर पहुंचकर संबोधित किया।

11.15 बजे मंच से उठकर रवाना हुए।

11.21 बजे ट्रेन बड़ोदरा के लिए रवाना हुई।

1. 46 मिनट आलीकदर ने किया संबोधित।


जल्द आएंगे आली कदर रतलाम

आमील साहब ने बताया कि शहर में तीन योजना पर काम चल रहा है। जिसमें कलीमी कॉलोनी की मस्जिद बन रही है। मौलाना का बंगला तैयार हो रहा है। बुरहानी मोहल्ला में दारुलईमारत बिल्डिग पर काम चल रहा है। आली कदर से आग्रह किया है, दुआ करते है कि काम पूरा होते ही उन्हें जल्द रतलाम लेकर आएंगे।


आस्था की झलकियां

- आली कदर मात्र छू ले, वह बरकत के रूप में अपने पास रहे। इसलिए हजारों की सं या में पहुंचे समाजजन हाथों में रुमाल एवं फलों की टोकरी, पंच मेवा आदि लेकर पहुंचे थे।

- हाथों और मंच पर बिछाई गई कॉलीन के नीचे भी रुमाल रखे गए थे, ताकि उस पर से धर्मगुरु गुजर जाए।

- जिस पर बैठकर आली कदर ने संबोधित किया, जाने के बाद समाजजनों ने उसे चुमकर आशीर्वाद लिया।

- बुरहानी बैंड की धून पर नन्हे बच्चे, महिलाएं भी मौला-मौला मुफ²ल मौला से अभिवादन कर रहे थे।

- ट्रेन गुजरने के चंद मिनटों बाद स्टेशन ही बिखरी पढ़ी सामग्री की जि मेदारी पूर्वक साफ-सफाई कर दी।


अलीगढ़ में यूनिवर्सिटी ने चांसलर की पदवी से नवाजा

शब्बीरभाई सेठजीवाला, मुस्तफा हेंडसम ने बताया कि मौला अलीगढ़ से दिल्ली के बाद कोटा होते हुए रतलाम पहुंचे थे। यहां से वे बड़ोदरा होते हुए मुंबई के लिए रवाना होंगे। आपको अलीगढ़ यूनिवर्सिटी ने चांसलर की पदवी नवाजा गया एवं दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात कर रतलाम पहुंचे थे। दाऊदी बोहरा समाज की व्यवस्था इतनी जि मेदारी पूर्ण रही कि ट्रेन गुजरने के चंद मिनटों बाद स्टेशन पूरी तरह से साफ कर दिया गया। वहीं सभी समाजजन आली कदर का दीदार कर सके, इसके लिए बनाया गया रेंप की व्यवस्था भी लोगों को काफी पसंद आई। इस मौके पर शहर पुलिस एवं जीआरपी के अलावा रेलवे प्रशासन की व्यवस्था को भी समाजजनों सराहा। इसके लिए अंजुमन कलीमी एवं बुरहानी जमात ने आभार माना।

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