हमें रतलाम स्टेशन पर आया छे... मैं दुआ करू छूं के जल्द तमारा शहर मा आउ...अने इतमिनान से रहूं...रतलाम ना हजारों मुमनिन दीदारवास्ते हाजीर थया छे... एक दिन एवो आवे कि हमे तमारा शहर मा आवीये...आज जुमआ ना दिन मा मोह मदुल मुस्तफा (सअस) से दुआ करू छूं....खुदा आप सब ने आबाद शाद खुश ओ खुर्रम बाकि राखे। रोजी मा बरकत दे, एक ईमाम हुसैन ना गम ना सिवा कोई गम न दिखावे...या हुसैन...। कहकर मातम करवाया...ये शब्द है दाउदी बोहरा समाज के 53वें दाई सैयदना आली कदर मुफद्दल सैफुद्दीन भाई साहब के है। जिन्होंने शुक्रवार को रतलाम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म न बर 4 पर बने मंच से समाजजनों को संबोधित किया। आली कदर के दीदार के लिए पांच हजार से अधिक की सं या में रतलाम सहित अन्य जिलों से स्टेशन पर समाजजन पहुंचे थे। मुबारक मौला-मौला मुफद्दल मौला...मौला मौला मुफद्दल मौला...से पूरा परिसर गूंज रहा था। मौला करीब 22 मिनट रतलाम स्टेशन पर समाजजनों के मध्य रहे, इसके बाद बड़ोदरा के लिए रवाना हो गए। मौला के दीदार के लिए कोई व्हीलचेयर पर आ रहा था, किसी की आंखों से अश्रुधारा बह रही थी, हर कोई हाथ जोड़कर मौला मौला पुकार रहा था, ताकि एक नजर भर उन्हे मौला निहार ले...ये आलम समाज की एकता, अनुशासन और धर्मगुरु के प्रति प्रेम समर्पण की भावना सबकुछ बयां कर रहा था। इस अवसर पर समाज की आमील साहब शेख तय्यबभाई मदारवाला, शेख अली असगर भाई पूनावाला, जनाब मुल्ला हुसैन भाई की उपस्थिति में स्टेशन पर अंजुमन कलीमी जमात, अंजुमन बुरहानी जमात, बुरहानी गार्ड, शबाब कमेटी ने सारी व्यवस्था संभाल रखी थी। रतलाम सहित जावरा, सैलाना, ताल, नामली, बडऩगर, बदनावर, धार, मेघनगर, सैलाना, पेटलावद और बड़ौदा आदि स्थानों से भी बड़ी सं या में समाजजन रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर सैय्यदना साहब का दीदार किया।