
Holi has connection with Hanuman ji
रतलाम। प्राचिन ग्रंथ से लेकर शास्त्र में होलिका दहन के बारे में विस्तार से लिखा हुआ है। इस बात की जानकारी कम लोगों को है की होली दहन का कनेक्शन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के दूत भगवान हनुमान जी से भी है। होली की रात अगर भगवान हनुमान जी को विशेष तरीके से बनाया हुआ पान चढ़ाया जाए तो भगवान भक्त की सर्वमनोकामना पूरी करते है। ये बात पंडित संजय दवे ने कही। वे भक्तों को हनुमान जी के विशेष पान से होली की रात किस तरह नसीब बदले ये तरीका बता रहे थे।
ज्योतिषी दवे ने कहा कि मान्यता यह है कि होली की पूर्णिमा को यानी रंग खेलने से पूर्व होलिका दहन (पूर्णिमा) पर हनुमानजी को एक विशेष पान अर्पित करना चाहिए,जिससे जीवन में कई प्रकार की परेशानियां दूर हो जाती हैं।
होली के रंगबिरंगे पर्व पर रामभक्त हनुमान जी को पान चढ़ाने का रिवाज है। इस पान के साथ विशेष प्रार्थना भी की जाती है। मान्यता यह है कि होली की पूर्णिमा को यानी रंग खेलने से पूर्व होलिका दहन (पूर्णिमा) पर हनुमानजी को एक विशेष पान अर्पित करने से जीवन की हर समस्या का नाश होता है।
इस तरह बनवाएं हनुमान जी के लिए विशेष पान
इस पान में केवल कत्था, गुलकंद, सौंफ, खोपरे का बुरा और सुमन कतरी डलवाएं। यह पान एकदम ताजा, मीठा और रसभरा होना चाहिए। ध्यान रहे कि इस पान में चूना,तंबाकू व सुपारी नहीं डालती है। विधि-विधान से पूजन करने के बाद अरज करें हे हनुमानजी। यह मीठा पान आपको अर्पण है। इसी तरह मेरे जीवन में मिठास भर दीजिए। हनुमानजी को यदि यह बोलकर अर्पण किया जाए तो बजरंगबली की कृपा से बहुत जल्दी हर समस्या दूर होगी।
इस मंत्र से होता लाभ
ज्योतिषियों के अनुसार होली पर कई सारे टोटके और मंत्र आजमाए जाते हैं। लेकिन अगर आप कई उपाय नहीं आजमा सकते हैं तो होली के एकमात्र शुभ मंत्र का जाप भी आपको कई लाभ पहुंचा सकता है। यह एक ही मंत्र है जिसके जप से होली पर पूजा की जा सकती है और इसी शुभ मंत्र से सुख,समृद्धि और सफलता के द्वार खोले जा सकते हैं। पंडितों के अनुसार इस मंत्र का उच्चारण एक माला,तीन माला या फिर पांच माला विषम संख्या के रूप में करना चाहिए।
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता होलि-होलि बालिशै: अतस्वां पूजजिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम:
शिव-पार्वती की पौराणिक कथा के वाचन से
होली की एक पौराणिक कथा के अनुसार हिमालय पुत्री पार्वती चाहती थीं कि उनका विवाह भगवान भोलेनाथ से हो जाए परंतु शिवजी अपनी तपस्या में लीन थे। तब कामदेव पार्वती की सहायता के लिए को आए। उन्होंने प्रेम बाण चलाया और भगवान शिव की तपस्या भंग हो गई। शिवजी को बहुत क्रोध आया और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी। कामदेव का शरीर उनके क्रोध की ज्वाला में भस्म हो गया। फिर शिवजी ने पार्वती को देखा। पार्वती की आराधना सफल हुई और शिव जी ने उन्हें अपनी सहचरी के रूप में स्वीकार कर लिया। होली के दिन इस पौराणिक कथा के वाचन से दांपत्य जीवन में प्रेम रस बना रहता है। अविवाहितों को भी मनचाहे साथी पाने के लिए इस कथा का श्रवण होली के दिन करना चाहिए।
Published on:
18 Mar 2019 07:02 am
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