
रतलाम। एमसीआई की रोक के बावजूद जिला अस्पताल में बच्चेदानी का ऑपरेशन सामान्य सर्जन ही कर रहे हैं, जबकि ऐेसे ऑपरेशन केवल गायकोनॉलाजिस्ट ही कर सकते हैं। यहां एक वर्ष में करीब २५० से ३०० ऑपरेशन होते हैं। इसमें बड़ी संख्या एेसी महिलाओं की है, जिनकी उम्र करीब ४० वर्ष से भी कम है। कम उम्र की महिलाओं की बच्चेदानी निकालना भी चिकित्सकीय प्रणाली में गलत माना जाता है।
करीब एक पखवाडे़ पूर्व नरसिंहगढ़ में एेसे दो चिकित्सकों को इसी वजह से निलंबीत किया गया था, लेकिन यहां 'सब कुछ चलता हैÓ की तर्ज पर चल रहा है। सामान्य सर्जन ही महिलाओं की बच्चेदानी का ऑपरेशन कर उसे अलग कर दे रहे हैं।
महिलाओं में बढ़ जाता है दिल के दौरे का खतरा
ऑपरेशन कम से कम ४०-४५ वर्ष की उम्र के पूर्व नहीं होना चाहिए। महिला रोग विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में बच्चेदानी निकालने से एेसी महिलाओं को दिल का दौरा, हड्डी कमजोर होना, कमर व हाथपैर में दर्द होना आदि की शिकायत होती है। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीता मालवीय के अनुसार इससे शरीर पर कई तरह का दुष्प्रभाव दिखता है। महिलाएं विभिन्न बीमारियों की चपेट में आने लगती हैं। महिलाएं अपने असली उम्र से ज्यादा उम्र की दिखने लगती हैं।
यह है नियम
एमसीआई यानी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडीया के आठ अक्टूबर २०१६ को हुए नए एेमेंडडेंट के अनुसार कोई सर्जन जो विशेषज्ञ न हो, एेसे ऑपरेशन नहीं कर सकता है। इसके लिए मेडिकल काउंसिल एक्ट २०-ए व ३३-एम में व्याख्या की गई है। लेकिन जिला अस्पताल में ये सब धड़ल्ले से चल रहा है। मुझे तो जानकारी ही नहीं
एमसीआई के नियम अनुसार सर्जन बच्चेदानी का ऑपरेशन नहीं कर सकता। मुझे ये जानकारी नहीं है कि जिला चिकित्सालय में एेसा हो रहा है या नहीं। एेसा हो रहा है तो जांच करके रोक लगाई जाएगी।
डॉ. आनंद चंदेलकर, सीएस, जिला अस्पताल
विशेष छूट मिली है
गायकॉनॉलॉजिस्ट नहीं हो, तब विशेष परिस्थिति में इस प्रकार के ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसलिए ये मेरे अनुसार गलत नहीं है। इसलिए ऑपरेशन करता हूं।
डॉ. राज दुलानी, जिला चिकित्सालय

Published on:
13 Feb 2018 05:07 pm
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