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दारुल उलम में हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल बना अस्पताल

मदरसे में ऑक्सीजन के साथ 30 बेड का अस्पताल, 2 चिकित्सक की उपस्थिति में अस्पताल संचालित

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रतलाम. शहर के बायपास रोड स्थित दारुल उलूम आएशा सिद्धिकी लीलबनात मदरसा के गर्ल्स होस्टल में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल खोला जा रहा है, जिन कमरों में बच्चों को उर्दू के साथ अन्य विषयों की तालीम दी जाति थी, आज उन्ही कक्षाओं में कोरोना से जंग की तैयारी चल रही है। मरीजों के इलाज की सुविधाएं जुटाई जा रही है, जहां हर धर्म व समाज के लोगों का इलाज होगा और इस अस्पताल का संचालन भी जिस समाज सेवी संस्था के द्वारा होगा उसमे हिन्दू मुस्लिम सभी धर्म के लोग एक साथ जुड़कर इस अस्पताल का संचालन करेंगे।

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इस मदरसे में 30 बेड के इस अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए न सिर्फ बेड बल्कि, ऑक्सीजन की भी व्यवस्था रहेगी, इसके अलावा 2 चिकित्सक की उपस्थिति में अस्पताल संचालित होगा। नर्स स्टाफ भी यहां मौजूद रहेगा। वहीं जो भी संससाधन कोरोना मरीज के लिए जरूरी है वह सभी यहां उपलब्ध रहेंगे।

आज के वक्त में जब कोरोना संक्रमण की सुनामी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और शासकीय अस्पताल के अलावा प्राइवेट हॉस्पिटल में भी मरीजों के लिए जगह की कमी पड़ रही है। ऐसे में इस तरह से कोविड अस्पताल का संचालन कोरोन मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

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कोविड सेंटर को सहयोग संस्था द्वारा संचालित किया जा रहा है इस संस्था में मदरसा कमेटि के अलावा लायंस क्लब भी साथ होगा, संस्था में कोंग्रेस नेत्री याशमीन शेरानी भी जुड़ी है,सभी मिलकर इस कोविड सेंटर में मरीजों के लिए तमाम सहूलियत जुटाई जा रही है और जिला प्रशांसन के जानकारी में लाकर इस पूरे कोविड सेंटर का संचालन जल्द शुरू कियूए जाएगा।

इसमे सिर्फ उन्हीं लोगो से इलाजे का न्यूनतम खर्च लिया जाएगा जो व्यव्य करने में समर्थ है इसके अलावा सभी मरीजों का निशुल्क इलाज होगा और सारा खर्च संस्था के सदस्य वहन करेंगे।

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