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टैक्स बचाना है तो ये खबर है काम की

अब टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है। एेसे में ये खबर बताएगी किस तरह आपका टैक्स बच सकता है।

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INCOME TAX NEWS

रतलाम। आयकर विभाग इन दिनों काफी सक्रिय हो गया है। एडंवास टैक्स के बाद अब ये देखा जा रहा है कि जो टारगेट नए करदाता बढ़ाने के लिए दिए थे, वह पूरा नहीं हुआ तो किस तरह से इस टारगेट को पूरा किया जाए। एेसे में कर बचाना है तो ये खबर आपके काफी काम आएगी। रतलाम के प्रमुख कर सलाहकार गोपाल काकानी बता रहे है वो पांच तरीके जिससे आप आसानी से अपने कर को बचा सकते है।

31 मार्च का समय अब करीब आ रहा है। एेसे में इनकम टैक्स रिटर्न भरने का समय अब नजदीक आ रहा है, ऐसे में यह हिसाब-किताब लगा लेना चाहिए कि रिटर्न भरते हुए छूट का लाभ कैसे उठाए जाए। रिटर्न भरते समय आयकर अधिनियम 80C, 80D आदि के तहत छूट दी जाती है। ऐसे में यह जानकारी होना चाहिए कि अंतिम वक्त पर क्या प्लानिंग करके कर देनदारी को कम किया जा सकता है।

पहले जान ले की क्या है 80C और 80D आयकर अधिनियम

अगर किसी ने लाइफ इंश्योरेंस, बाजार से संबंधित निवेश (म्यूचुअल फंड), पीपीएफ, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) आदि में इन्वेस्ट किया हुआ है तो वह आयकर अधिनियम 80C के तहत छूट की मांग कर सकता है। वहीं अगर किसी ने खुद का या परिवार के सदस्यों का हेल्थ इंश्योरेंस करवाया हुआ है तो उसे आयकर अधिनियम 80D के तहत छूट मिलेगी। डोनेशन करने वालों को आयकर अधिनियम 80G और एजुकेशन लोन लेने वालों को आयकर अधिनियम 80E के तहत छूट दी जाती है। इनमें से किसी में भी निवेश करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

निवेश से पहले जाने ये नियम

1- सबसे पहले यह देखें कि कुल इनकम में से कितना टैक्स डिडक्शन ले सकते हैं। आयकर अधिनियम 80सी के तहत कुल इनकम में से सालाना 1.5 लाख तक छूट ली जा सकती है। वहीं अगर लिमिट इससे ज्यादा हो रही है तो नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश कर सकते हैं।

2- फिर यह देखा जाना चाहिए कि आयकर अधिनियम 80C के इतर कहां-कहां पैसा देना है, जैसे होम लोन, हेल्थ प्लान, एजुकेशन लोन। फिर देखें कि आयकर अधिनियम 80C के तहत कहां-कहां पैसा देना है, जैसे बच्चों की ट्यूशन फीस, लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम आदि। इस सबको जोड़कर देखें कि अभी कितनी रकम टैक्सेबल इनकम में आ रही है। उस हिसाब से कहीं निवेश करें।

3- निवेश मुख्यत: दो तरीके के होते हैं। एक होता है फिक्स, इसमें तय होता है कि कितना रिटर्न मिलेगा। वहीं दूसरा निवेश होता है मार्केट के हिसाब से रिटर्न देने वाला। पीपीएफ, हृस्ष्ट, सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम से निश्चित रिटर्न मिलता है। वहीं म्यूचुअल फंड का रिटर्न मार्केट के हिसाब से तय होगा।

4- ऊपर बताए गए निवेश के तरीके से किसी को चुनकर यह भी तय करना होगा कि कितने वक्त के लिए पैसा लगाना है। मीडियम से लॉन्ग टर्म प्लान की अवधि तीन से 15 साल तक होती है।

5- पैसा निवेश करने के बाद उसपर मिलने वाले रिटर्न पर जो टैक्स लगता है उसका भी ध्यान रखना होगा। जैसे एनएससी आपको 80सी के तहत छूट तो दिलवाते हैं, लेकिन उनपर मिलने वाले रिटर्न पर टैक्स देना होता है। एनएससी पर फिलहाल सालाना 7.8 प्रतिशत का रिटर्न मिल रहा है।