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VIDEO – ये है हमारे होनहार कर्मचारी, इंजन खराबी सुधारने में लगाते हैं जी-जान

रतलाम मंडल की उपलब्धि - 30 अगस्त 2019 को पहला इंजन सुधारा, तब से अब तक पाई कई उपलब्धि, इनसे सीखें, कार्य 48 घंटे तक कैसे करते हैं,इंजन की खराबी सुधारने में लगाते हैं जी-जान  

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Ratlam Railway Division Dieselshed

Ratlam Railway Division Dieselshed

रतलाम. 30 अगस्त 2019 वो दिन था, जब रतलाम रेल मंडल के डीजलशेड में पहली बार बिजली से चलने वाले इंजन को सुधारा गया था। तब से अब तक 427 इंजन में सुधार का काम हो गया है। करीब 50 वर्ष से अधिक पूर्व आईएसओ - 9001 अवॉर्ड प्राप्त डीजलशेड ने पहला इलेक्ट्रिक इंजन सुधारने का काम किया। इसके लिए कर्मचारियों के छह बैच के 60 कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया था। इन कर्मचारियों ने अन्य को प्रशिक्षित किया। शेड को बिजली से चलने वाला इंजन (वलसाड से) मिला था।

अब हो रहा ये काम
रतलाम डीजलशेड को लोकोमोटिव केयर सेंटर बना दिया गया। यहां पर पश्चिम रेलवे के परेल, वलसाड़, साबरमती, अहमदाबाद, बड़ोदरा के साथ - साथ अन्य जोन के बिजली इंजन भी सुधार के लिए आने लगे हैं। सामान्य रुप से सर्विङ्क्षसग करना हो तो 5 से 7 दिन लगते है लेकिन पूर इंजन खोला जाए तो इसको सुधारने में 10 से 12 दिन लगते है। हाल ही में यहां के कर्मचारियों ने 48 घंटे काम करके एक इंजन का रखरखाव किया है।

प्रशिक्षण दिया कर्मचारियों को

रतलाम डीजलशेड में इस काम करने के लिए बिजली इंजन के मेंटेनेंस करने के लिए छह टीमों का गठन किया गया। इस प्रत्येक टीम में 10 सदस्य रखे गए।

इस तरह बढ़ी रफ्तार

दल ने बड़ोदरा से 9 अगस्त 2019 को मिले इंजन को 19 अगस्त को मेंटेनेंस करना शुरू किया व 22 अगस्त तक मैंटेनेंस कर दिया।

उपलब्धि का सफर...

वर्ष सुधारे
2019 - 20 23
2020 - 21 53
2021 - 22 83
2022 - 23 132
जनवरी 2023
अब तक - 136

कर्मचारियों की मेहनत


रतलाम डीजलशेड का नाम पूरे भारत में बेहतर कार्य करने की वजह से लोकप्रिय हो रहा है। यहां पर जिस तरीके से मेहनत कर बिजली इंजन में सुधार किया जा रहा है, वो प्रेरणा लेने लायक है।

- रजनीश कुमार, डीआरएम रतलाम