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रेलवे का यात्रियों को बड़ा झटका, एक बार में ही पांच गुना कर दी फीस

रेलवे का यात्रियों को बड़ा झटका, एक बार में ही पांच गुना कर दी फीस

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Indian Railway News

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रतलाम। यात्रियों को सुविधा देने का दंभ भरने वाले रेलवे ने ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को बड़ा झटका दिया है। सोशल मीडिया पर रेलवे से अनेक प्रकार की मदद मांगने वाले यात्रियों को ये झटका रेलवे ने दिया है। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश से पश्चिम रेलवे सहित देशभर के रेल मंडल में ट्रेन से यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों की जेब पर इस आदेश से तगड़ा असर पडेग़ा। रेलवे ने एक बार में ही एक खास काम की फीस को पांच गुना कर दिया है।

प्रभु ने शुरू की थी ये सेवा

असल में ट्रेन में यात्रा के दौरान किसी मरीज की तबीयत खराब होती थी तो उसको इलाज के लिए रेलवे अस्पताल के चिकित्सक को बुलाया जाता रहा है। बाद में तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने सेाशल मीडिया पर इस सेवा को शुरू करवा दिया। एेसे में अगर यात्री बीमार होता है तो सूचना मात्र से चिकित्सक स्टेशन पर उपलब्ध होता व इलाज करता रहा है। इलाज के बाद जब रुपए की मांग होती तब विवाद होता था। रेलवे बोर्ड ने वर्षो पहले डॉक्टर परामर्श शुल्क 20 रुपए तय किया था। यह दर अभी तक लागू थी। मंगलवार को इसमें वृ़द्धि करते हुए रेलवे बोर्ड के ट्रांसफार्मेशन एक्जीक्युटिव डायरेक्टर राजेश गुप्ता ने सभी जीएम को इसके आदेश जारी कर दिए हैं।

मंडल में है फैक्ट फाइल

जनवरी-42

फरवरी-18

मार्च-37

अप्रैल-14

मई-35

जून-24

जुलाई 10 तक-9

अब ये कर दी फीस

रेलवे ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए ट्रेन या स्टेशन पर बीमार होने वाले यात्री के इलाज के अब तक लगने वाले 20 रुपए के शुल्क को पांच गुना बढ़ाकर सीधे 100 रुपए करने के आदेश मंगलवार से जारी कर दिए है। इस आदेश को जारी करने के पीछे का कारण यात्रियों द्वारा पैर दर्द, सर दर्द जैसी समस्या को भी ट्वीटकर चिकित्सक बुलाना बताया जा रहा है।

इस तरह होता है इलाज

असल में ट्रेन में यात्रा के दौरान जब किसी मरीज या यात्री का स्वास्थ्य अधिक खराब होता है तो सोशल मीडिया पर ट्वीट करके या ट्रेन के टीटीई को सूचना देकर चिकित्सक की मांग की जाती है। इसके बाद रेलवे नियंत्रण कक्ष में सूचना दी जाती है। इस सूचना के बाद रेलवे अस्पताल में सूचना पहुंचाई जाती है। ये सब स्टेशन पर ट्रेन के आने के पूर्व होता है। ट्रेन के स्टेशन पर आने पर बताए गए डिब्बे में चिकित्सक पहुंचता है। अगर तबीयत अधिक खराब पाई जाती है तो अस्ताल में भर्ती होने की सलाह दी जाती है। अन्यथा चेकअप के बाद दवा आदि दी जाती है।

यात्रियों की भलाई के लिए है

रेलवे ने ये सुविधा यात्रियों की भलाई के लिए शुरू की है। इससे अब तक सैकड़ों यात्री मंडल में लाभ उठा चुके है। वरिष्ठ कार्यालय के आदेश का पालन मंडल में किया जाएगा।

- जेके जयंत, जनसंपर्क अधिकारी, रतलाम रेल मंडल