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36 वर्षों बाद बन्धु बेलड़ी की निश्रा में मंत्राधिराज नवकार की महाआराधना प्रारंभ

36 वर्षों बाद बन्धु बेलड़ी की निश्रा में मंत्राधिराज नवकार की महाआराधना प्रारंभ
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36 वर्षों बाद बन्धु बेलड़ी की निश्रा में मंत्राधिराज नवकार की महाआराधना प्रारंभ

नो दिनों तक चलेगा अखंड जाप, रात्रि में होगा चिंतन शिविर

रतलाम। नवकार महामंत्र शास्वत और सिद्ध है, इसका जो 68 लाख जप करें और जिस स्थान पर 68 करोड़ जप होता है, वे दोनों शक्तिपीठ हो जाते है। ऐसे महामंत्र का अनादिकाल से आज तक जप निरंतर जारी है। जितना अधिक जप उतना अधिक लाभ, ऐसे मंत्राधिराज की चातुर्मास में नव दिनी आराधना का अवसर बड़े भाग्य से मिलता है। इस भाग्य को अपना सौभाग्य बनाकर जीवन सफल करें।
आचार्य जिनचन्द्रसागरसूरि महाराज एवं हेमचंद्रसागर महाराज बंधु बेलड़ी द्वारा नवकार महामंत्र आराधना की इस महिमा वन्दन के साथ नवदिनी आराधना प्रारंभ हुई। इस दौरान अखंड जप भी चलेगा। जबकि 36 लाख आलेखन का अनुष्ठान निरंतर जारी है। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ रतलाम द्वारा आगमोद्धारक वाटिका पर धर्म जागरण चातुर्मास के 23वे दिन नवकार मय वातावरण हो गया। अखंड जप में सुबह 6 से शाम 7 बजे तक महिलाएं जबकि शाम 7 से सुबह 6 बजे तक पुरुष जप कर रहे है। जिसकी विधिविधान के साथ शुरुआत विधिकारक पं. निकुंज भाई अहमदाबाद ने करवाई। रात्रि में 8.30 से 9.30 बजे तक विधिकारक विशिष्ट वक्तव्य प्रदान करेंगे। यहां 68 तीर्थो की भाव यात्रा भी होगी। आराधना का यह सिलसिला 22 अगस्त तक चलेगा। रतलाम में धर्म जागरण चातुर्मास में इस आराधना का आचार्यश्री के सानिध्य में लाभ का यह दुर्लभ अवसर पुरे 36 साल बाद आया है। नवकार आराधना को लेकर समाजजनों में उत्साह है।

सावन में साधना की झड़ी
गुरु गुणानुवाद सभा में हेमचन्द्रसागर महाराज व गणिवर्य विरागचन्द्रसागर महाराज ने बताया साधना का सावन प्रारंभ हो चूका है, जिसमें आराधना की झड़ी लग रही है। अखंड जप का तो विशिष्ट महत्व है। यह दुनिया का ऐसा मन्त्र है जिसका अनादिकाल से जप चल रहा है, कोई भी क्षण ऐसा नहीं जाता है जब कोई इसका जप नहीं करता हो। प्रवक्ता पारस भंडारी ने बताया आराधना के लाभार्थी मोहनबाई कनकमल गुगलिया का श्री संघ की ओर से अध्यक्ष सुनील लालवानी, पारसनाथ सेवा समिति अध्यक्ष शांतिलाल पोरवाल और जैनानंद नवयुवक मंडल के संजय मूणत ने किया। भगवती सूत्र का स्वर्ण मुद्रा से पूजन का लाभ लालचंद सुराना परिवार ने लिया।

जनम से लेकर मरण तक बस दौड़ता है आदमी
रतलाम। जनम से लेकर मरण तक दौड़ता है आदमी और दौड़ते ही दौड़ते दम तोड़ता है आदमी। एक रोटी, दो लगोटी और तीन गज कच्ची जमीन, जिन्दगी में तीन चीजे ही जोड़ता है आदमी। यह विचार लोकेंद्र भवन पर आयोजित चातुर्मास में मुनिश्री विराटसागर ने धर्मसभा में उपस्थित गुरुभक्तों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए मोहमाया से परे रहकर अपनी आत्मा को धर्म से जोडऩे का आव्हान किया है। ताकि अंत समय में धर्म और अच्छे कर्मों के कारण उसके लिए स्वर्ग के द्वार खुले रहे।
मुनिश्री ने इस दौरान कविता और कव्वालियों की तर्ज पर कुछ रचनाएं सुनाकर मानव जीवन को सार्थक करने के तमाम उपाय है। प्रेरणादायी कविता के माध्यम से भक्तों को बताया कि....आंख गिली, होठ ठंडे और दिल में है आंधिया, एक ही दिन में तीन मौसम बदलता है, आदमी। सुबह पलना, शाम अर्थी और खटिया दोपहर में, एक ही दिन में तीन लकडिय़ा तोड़ता है आदमी। है यहां विश्वास कितना आदमी का मौत पर, मौते के हाथों ही सब कुछ छोड़ता है आदमी। जन्म से लेकर मरण तक दौड़ता है आदमी और दौड़ते ही दौड़ते दम तोड़ता है आदमी। मुनिश्री ने मन की खुराक को कम करो, मन को नियंत्रण में रखना हमारे हाथ में है जितना है उतने में खुश रहना सीखों और बाकि का जीवन भगवान को याद करनें में लगाओं। मन-जीवन-यौवन और माया क्षण भर के मेहमान है, ये जिन्दगी एक सराय है।
शंका समाधान कार्यक्रम के चार वर्ष पूर्ण

चातुर्मास समिति के प्रवक्ता मांगीलाल जैन ने बताया कि मुनिश्री प्रमाणसागर के शंका समाधान शिविर के टीवी पर प्रसारित होते हुए चार वर्ष पूर्ण हो गए। इस मौके पर दिगम्बर जैन प्रभावना समिति द्वारा चैनल से जुड़े सभी संचालकों का स्वागत सम्मान किया गया। शंका समाधान कार्यक्रम में वर्ष 2017-18 में अच्छे सवाल कर अपनी शंका का समाधान चाहने वाले गुरुभक्तों का भी सम्मान किया गया है।
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समता शीतल बाग पर स्वाध्याय के लिए वाचनालय का शुभारंभ

फोटो आरटी-१४१३-
रतलाम। आचार्यश्री रामेश की प्रेरणा से स्वाध्याय के लिए सोमवार सुबह समता शीतल बाग पर वाचनालय का शुभारंभ किया गया। इसमें ज्ञानार्जन के लिए कई पुस्तकें सुलभ कराई गई है। वाचनालय का शुभारंभ नवकार महामंत्र का जाप कर किया गया। चातुर्मास संयोजक महेंद्र गादिया, रतलाम श्री संघ अध्यक्ष मदनलाल कटारिया ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ज्ञान प्राप्ति के लिए स्वाध्याय बहुत जरूरी है। वाचनालय इसमें मददगार साबित होगा। संचालन महेश नाहटा ने किया। इस दौरान श्री संघ के मंत्री सुशील गौरेचा, राजू भाई कोठारी सहित कई धर्मालुजन उपस्थित थे।

राह पर चलना आसान, नई राह बनाना मुश्किल

रतलाम। समता कुंज में अमृत देशना देते हुए आचार्यश्री रामेश सोमवार सुबह धर्मसभा में कहा कि मानव जन्म में पांच इंद्रियों के आनंद और चार कषायों के वश में नहीं रहे। आरोहणा के माध्यम से उच्च से उच्च स्थान पर जाने का लक्ष्य रखे। श्रद्धा परम दुर्लभ है, इसलिए इससे कभी डिगे नहीं। श्रद्धा का संरक्षण कर मन में इसका दीप को जलाए रखने से आत्मोत्थान होगा। श्रद्धा पैदा होना बहुत बड़ी बात है। बहुत सारे जीवों को श्रद्धा नहीं मिलती है। देव, गुरु, धर्म पर आस्था नहीं होगी, तो श्रद्धा रखना मुश्किल होगा। हमारी श्रद्धा किसी भी परिस्थिति में कम नहीं हो, ऐसा प्रयास सभी करे। श्रद्धा ही साधना की नींव है। इसका दामन थामकर संसार से बेड़ा पार हो सकता है।
पंथकमुनि ने कहा कि आस्था में संकल्प और विकल्प नहीं होते। दुविधा नहीं होती है। प्रमाणित सिद्ध करने की जो कोशिश करते है, सही मायने में वे ही अप्रमाणित होते है। आस्था मजबूत रखेंगे, तो मंजिल हर हाल में प्राप्त हो जाएगी। आदित्य मुनि ने भी संबोधित किया। आरंभ में साध्वी मंडल ने गीत प्रस्तुत किया। इस मौके पर आचार्यश्री से रमेश उपाध्याय ने आजीवन शील व्रत का प्रत्याख्यान लिया। कई तपस्वियों ने कठिन तप-आराधना के प्रत्याख्यान लिए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकागण उपस्थित थे।