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रतलाम के चार उत्पाद के स्वादों को मिली जीआई टैग पहचान

रियावन के लहसुन के बाद अब देश-विदेश में फिर नई पहचान, किसानों को मिलेगा उपज का बेहतर मूल्य, सैलाना के वाली गांव की बालम ककड़ी, बांगरोद के मालवी गराडू , रतलामी सेव को पहचान मिल चुकी हैं
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Ratlam GI Tag News

रियावन के लहसुन के बाद अब देश-विदेश में फिर नई पहचान, किसानों को मिलेगा उपज का बेहतर मूल्य

रतलाम। जिला रतलाम अब देश-विदेश में चार उत्पादों के स्वादों के साथ नई पहचान लिए खड़ा नजर आएगा। इससे किसानों को भी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। रतलामी सेव, रियावन की लहसुन के बाद अब बालम ककड़ी और रतलाम का मालवी गराडू को भी जीआई टैग पहचान मिल चुकी हैं।

इससे पहले रियावन लहसुन को जीआई टैग मिल चुका है। अब यहां की बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को 'मालवी गराडू' नाम से भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) मिला है। यह पहचान मंत्री चेतन्य काश्यप के प्रयासों से मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के विभागों को जिलावार प्रमुख वस्तुओं को जीआई टैग दिलाने के निर्देश किए थे।

अंतरराष्ट्रीय पहचान होगी मजबूत
उद्यानिकी विभाग के तहत रतलाम की रियावन लहसुन पहले ही जीआई टैग प्राप्त कर चुकी है। जीआई टैग से इन उत्पादों की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी। इससे स्थानीय किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, उत्पादन क्षेत्र का विस्तार होगा और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी।

रसीली बालम ककड़ी, एंटीऑक्सीडेंट्स गुण गराडू में
जिले में करीब 100 हेक्टेयर में बालम ककड़ी और लगभग 120 हेक्टेयर में गराडू का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में किसान जुड़े हैं। सैलाना की केसरिया बालम ककड़ी अपने रसीले स्वाद और विशिष्ट रंग के लिए जानी जाती है, वहीं रतलामी गराडू अपने बेहतरीन स्वाद, अंदर से मुलायम और बाहर से कुरकुरा बनने की विशेषता के लिए प्रसिद्ध है। यह विटामिन, खनिज और फाइबर का भी अच्छा स्रोत है। इसमें दिमाग की कार्यप्रणाली विकसित करने वाले तत्व और एंटीऑक्सीडेंट्स गुण भी हैं, जो शुगर को नियंत्रित करते हैं।

विशिष्ट पहचान ने दिलाया जीआई टैग
भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग एक एसा प्रतीक है जो उन उत्पादों पर उपयोग किया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है, जिनमें उस उत्पत्ति के कारण गुण या प्रतिष्ठा होती है। यह टैग उत्पाद की गुणवत्ता, विशिष्टता और पारंपरिक उत्पादन विधियों की गारंटी देता है। यह उत्पादों की नकल रोकने, निर्यात बढ़ाने और स्थानीय कारीगरों व किसानों को उनके पारंपरिक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मूल्य दिलाने में सहायक होता है।

इनका कहना है
यह उपलब्धि जिले के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इससे रतलाम के उद्यानिकी उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी।
मंगलसिंह डोडवे, उपसंचालक उद्यानिकी विभाग