
धर्मनगरी से जैनमुनि का विहार, नम हुई आंखें
रतलाम। धर्मनगर में चार माह चातुर्मास कर विहार को निकले जैनमुनि को देख सैकड़ों धर्मालुओं की आंखें नम हो गई। गुरुदेव को विदाई देने के लिए पूरा समाज उमड़ पड़ा था। क्या बच्चे क्या बड़े सबकी आंखे नम थी, गुरुदेव हम को भूल न जाना लोट के वापस जल्दी आना...भक्तों के भगवान की जय, गुरुदेव आपकी जय हो, गुरुदेव आपके संदेश को घर-घर तक पहुंचाएंगे... ऐसे गगनभेदी नारो से स्थानक गूंज उठा। ओजस्वी वक्ता गुरुदेव प्रियदर्शन महाराज, प्रशांतमना सौम्यदर्शनश्री, विरागदर्शनश्री महाराज का बुधवार को नीमचौक स्थानक से चातुर्मास समाप्ति पर प्रात: विहार हुआ। महाराजश्री प्रमुख मार्गों से होते हुए जैन कालोनी महलवाड़ा पहुंचे।
इसलिए कहता हूं कि आपके जीवन में भी प्रेम बना रहे
जैन कालोनी में गुरुदेव ने अंगूर के गुच्छो और खुले अंगूर के रूपक के माध्यम से समझाया की संगठन में रहने पर ही व्यक्ति की कीमत होती है, हमारी कीमत तभी तक है जब तक हम धर्म से जुड़े रहेंगे। प्रेम से जुड़े रहेंगे। आत्मीयता से जुड़े रहेंगे। चाहे आपका घर है चाहे परिवार है और चाहे समाज है। जहां पर भी प्रेम का जुड़ाव है आत्मीयता का जुड़ाव है वही पर विकास है और इसलिए कहता हूं कि आपके जीवन में भी प्रेम बना रहे, आप भी संघ से जुड़े रहे। साधना से जुड़े रहे और जिसने साधना से अपना जुड़ाव करा वो अपनी कीमत को बड़ा लेता है और जिसने साधना का त्याग कर दिया वो अपनी कीमत को घटा लेता है। गुरुवार सुबह 07.15 पर शास्त्री नगर ललित पटवा के निवास स्थान से राजबाग सैलाना रोड पर मानमल छाजेड के निवास स्थान जाऐंगे। 14 नवंबर शाम को कस्तूरबा नगर स्थानक और 15 नवंबर के प्रवचन स्टेशन रोड स्थानक पर रहेंगे।
अपने तन मन धन का सदुपयोग समाज के हित के लिए करे
महाराजश्री ने कहा कि आप सब से यही निवेदन की चार माह तक आपने साधना से जुडने का प्रयास किया। संतों से जुडने का प्रयास किया, हर पर उस जुड़ाव को बरकरार रखे, चार माह तक जो आपने सुना उसका चिंतन करना है मनन करना है। एक-एक सूत्र को रोज उठाना है और उससे अपने आप को जोडऩा है, अगर आप अपने आप को जोड़ पाये तो आपका तो आपका सुनना सार्थक हो जाएगा और मेरा सुनाना सार्थक हो जाएगा, यही मंगल कामना आप सबके लिए है। आप समाज के लिए कार्य करते आए है आगे भी यह संकल्प लेवे की अपने तन मन धन का सदुपयोग समाज के हित के लिए करे। इस बार आप युवा साथियों ने गोचरी की बहुत अच्छी सेवा करी,विक्रम पितलिया लगातार 4 माह तक गोचरी सेवा में संतो के साथ रहे।
Published on:
13 Nov 2019 10:34 pm
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