रतलाम। चातुर्मासिक प्रवचन में शनिवार सुबह आचार्य प्रवरश्री विजयराज महाराज ने मर्यादा को जीवन का सर्वोत्कृष्ठ आभूषण बताया है। सबको अपनी मर्यादा में रहना चाहिए। मकान को दीवार सुरक्षित रखती है और पैसे को पर्स सुरक्षित रखता है, तो आत्म संपदा मर्यादा से सुरक्षित रहती है। मर्यादा तोड़ने वाले आत्म संपदा से वंचित रह जाते है।
आचार्यश्री की निश्रा में 5 नवंबर को दशवैकालिक सूत्र पर संगोष्ठी होगी। दो सत्रों में होने वाली संगोष्ठ का पहला सत्र सुबह 9 बजे छोटू भाई की बगीची होगा। दूसरा सत्र दोपहर डेढ बजे सिलावटों का वास स्थित नवकार भवन में रखा गया है। छोटू भाई की बगीची में आयोजित प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा मर्यादा जीवन का सुख है, परिवार का स्वर्ग है, समाज की ताकत है और संसार का सुकुन है। इसलिए मर्यादा का पालन आनंददायी रहता है। मर्यादा का पालन जो भी करता है, वही परिवार को स्वर्ग बना सकता है और समाज को ताकतवर बनाकर देश में शांति एवं सुकुन रख सकता है।
अशांति का कारण मर्यादा का पालन नहीं होना
आचार्यश्री ने कहा कि आज समाज में अशांति का कारण मर्यादा का पालन नहीं होना है। मर्यादा के अभाव में आत्म संपदा सुरक्षित नहीं है। हर व्यक्ति मर्यादा का मूल्य और महत्व समझे तो सुख, शांति, आनंद सब आ जाएंगे। आचार्यश्री ने कहा कि चुनाव में नेता वोट मांगने आते है, कुछ लोगों को नोट मांगते देखा होगा, लेकिन संत को केवल खोट चाहिए। समाज में लोग संतों को कई वस्तुएं बहराते है, लेकिन अपनी खोट बहराने वाले विरले होते है। ऐसे लोगों से प्रेरणा लेकर सबकों अपनी खोट, कमी और कमजोरियां खत्म करनी चाहिए।
मनमुटाव खत्म कर आगे बढ़ना चाहिए
उपाध्याय प्रवरश्री जितेशमुनि ने कहा परमात्मा प्रिय बनने से पहले सबकों परिवार प्रिय बनने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए संतों की प्रेरणा से अपने मनमुटाव खत्म कर आगे बढ़ना चाहिए। प्रवचन में उदयपुर श्री संघ ने चातुर्मास की विनती की। आनंदीलाल बम्बोरियाय ने विचार रखे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकागण उपस्थित रहे।