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रतलाम

Watch video : भागवत कथा में बोली जयाकिशोरी भगवान के है तीन रूप

रतलाम। प्रसिद्ध भागवत वक्ता जयाकिशोरी का रतलाम के ग्राम कनेरी में आगमन हुआ। हजारों की संख्या में कथा श्रवण करने पहुंचे भक्तों भक्तिभाव से कथा वक्ता का स्वागत किया। कथा प्रारंभ करते ही पांडाल राधे-राधे से गूंज उठा। जयाकिशोरी ने उपस्थित श्रोताओं को बताया कि शास्त्र में भगवान की तीन स्वरूप बताए गए है, सत्-चित-आनंद मिलाकर हुए सच्चिदानंद, जिन्होंने इन तीनों को समझ लिया समझो सच्चिदानंद को समझ लिया।

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पहला है सत्…श्रोताओं से पूछा बताईये सत् की परिभाषा क्या है। किसी ने कहा सत्य, किसी ने वास्तविकता कहा…जयाकिशोरी ने बताया कि जो कभी न बदले अडीग रहे, वो सत्य। फिर जया किशोरी ने पूछा इस पूरे ब्रहाण्ड में ऐसा कौन है जो कभी नहीं बदलता बताईये। नहीं पता वह है ईश्वर जो हर स्थिति-परिस्थिति में हर जगह मौजूद रहते है वहीं सत्य है। संसार के साथ हम और आप हर छण बदल रहे है। नहीं बदली तो बचपन से आज तक ईश्वर की प्रार्थना, क्योंकि सुख-दु:ख मेंं हर वक्त भगवान का ही नाम लेते है। झूठ तो बदलते रहते हैं, इसलिए हमेशा उसका आश्रय लो जो कभी बदले नहीं।

श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया
यह विचार श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन प्रसिद्ध भागवत वक्ता जयाकिशोरी ने समीपस्थ ग्राम कनेरी में कही। बुधवार सुबह गांव में मां उमिया समिति के तत्वावधान में 151 गंगाजल कलश यात्रा निकाली गई, जिसका जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। इसके बाद कथा पांडाल में श्रोताओं का आना शुरू हो गया, देखते-देखते पूरा परिसर भक्तों से भर गया। कथा स्थल व सड़क पर श्रद्धालु टकटकी लगाए जयाकिशोरी के आने का इंतजार करते रहे। दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर कथा स्थल पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। जयाकिशोरी ने प्रभु को पाने का मंत्र गीत के माध्यम से बताया. इसके बाद…पार्वती बोली भोले से…ऐसा महल बनो दो…देखने वाला भी दंग रह जाए…गीत सुनाकर मंत्रमुग्ध करते हुए श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कथा स्थल पर पूजन वंदन आरती के बाद कथा की शुरुआत दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर राधे-राधे-राधे-राधे..बोलिये श्रीगणेशजी महाराज की जय के साथ की।

इन्होंने किया लड्डू गोपाल का पूजन वंदन…
सर्वप्रथम मंच पर पहुंचते ही जयाकिशोरी ने आराध्य देवों के साथ लड्डू गोपाल को वंदन कर व्यासपीठ पर विराजमान हुई। आरती में आयोजक मधुकिशोर पाटीदार, अशोक पाटीदार, नंदलाल पाटीदार, निर्मल पाटीदार, रमेशचंद्र पाटीदार, कन्हैयालाल पाटीदार, ओंकारलाल पाटीदार, राजकुमार गुर्जर, राकेश पाटीदार, महादेव राहुल पाटीदार आदि उपस्थित रहे। इस मौके पर शिप्रागिरी महाराज, महंत कृष्णराज, घटवासवाले गुरुजी का भी सान्निध्य मिला। प्रथम दिन 10 हजार से अधिक श्रोता कथा में शामिल हुए। शुरुआत में जयाकिशोरीजी ने कहा कि सात दिनों में मुझसे कोई गलती हो जाए, कोई बात अच्छी न लगे तो घर का बच्चा समझकर माफ कर दीजिएगा। वेदव्यासजी के बाद सुखदेवजी के अवतार की कथा सुनाई।

कथा के बताए नियम…
कथा वक्ता जयाकिशोरी ने कथा शुरू करने से पहले कहा कि कुछ सूचनाएं और नियम बताए। आप सब जब यहां आए तो कोई न कोई उम्मीद लेकर तो आएं होंगे कि जो कथा कर रहे है, बड़े ज्ञान होंगे..? नहीं। पहले ही बता देना अच्छा सात दिन बाद आप कहें तो नहीं है भाई। कोई कहे चलो अपने अनुभव सुना देंगी, उम्र को देखकर समझ सकते हो अनुभव नाम की भी कोई खास चिज नहीं मेरे पास है। कोई कहे वाणी अच्छी मधुर होगी, सात दिन निकल जाएंगे तो स्वीकार करती हूं कि वाणी में भी कोई माधुर्यभाव नहीं है। कोई कहें की भक्ति होगी मुझे तो नहीं दिखती। पर भी बैठ गए कथा करने। ये वही बात है कि ‘चाहत तो रस्सगुल्ले पाने की है, लेकिन गुण देखकर कोई गुड़ भी न दे… पर मैने कहा कि फिर भी अगर बैठे है तो किस कारण, केवल एक विश्वास और भरोसा है…कि अपने बुजुर्गों से सुना है। भला का संग हो तो सब काम भले ही भले होता है।

अगर आपकी संगत अच्छी है तो…
जयाकिशोरी ने बच्चों को भी सीख देते हुए बताया कि यह मनुष्य का स्वभाव है, जितना समय जिसके साथ बिताएंगे, उसकी बोली बोलने लगेंगे। बुरी आदते आसान है, अच्छा बनना कठिन है, बुरा बनना आसान है। व्यक्ति आसान रास्ता जल्दी चुनता है। कठिन रास्ते पर जाने में समय लगता है। इसलिए संभावना ये अधिक होती है कि अच्छा व्यक्ति बिगड़े, इसलिए आपकी संगत अच्छी होना चाहिए। कोई जबरजस्ती नहीं है, मा-बाप के लिए भी किसी चीज की जबरजस्ती नहीं करना, भगवान ने मनुष्य बनाया तो बुद्धी भी दी, जो करता है अपनी बुद्धी से करता है, और अगर जबरजस्ती ही समस्या का हल होता तो महाभारत का युद्ध नहीं होता। अगर आपको जिंदगी में कुछ अच्छा करना है तो संगती अच्छी होना चाहिए, बाकि आपकी मर्जी। भले का संग हो ता सब काम भले ही भले होते है। इन सात दिनों में मेरी संगती कौन है बताईये…भगवान उनकी कथा कहनी है उनकी बात करनी, भजन गाने है। अगर ये मेरे साथ है तो कथा व वाणी में भाव आ सकते है।

ये आपकी सात दिन की ट्यूशन है…
काफी लोग है जो पहली बार कथा सुन रहे है, ये कथा कुछ अलग होगी। क्योंकि जब भी आप कथा सुनते विश्राम पर कपड़े झाड़कर सबकुछ यहीं छोड़ कर घर के कामों में लग जाते हैं। फिर दूसरे दिन आकर बैठ जाते हैं ये यहां नहीं चलेगा। यहां से आप कथा सुनकर जाएंगे, ये सात दिन आपकी ट्यूशन रहेगी। में दूसरे दिन पूछगी की पहले दिन कौन-कौन सी कथाए कहीं, नहीं बताया तो आगे की कथा आरंभ नहीं होगी। अब अच्छे से सुनना पड़ेगा, ठीक है, भगवान भी खुश है, इसलिए तेज हवा चलने लगी।