
जिला अस्पताल की कई एंबुलेंस बिना फिटनेस चल रहीं, 41 में से 19 की जांच, शेष दौड़ रही। किसी के दरवाजे-स्ट्रेचर खराब, मरीजों की सुरक्षा पर प्रश्न
रतलाम. शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए संचालित 108 एंबुलेंस और जननी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण सरकारी वाहन सेवाएं मरीजों की जान जोखिम में डालकर चल रही हैं।
जिले में कई एंबुलेंस बिना फिटनेस परीक्षण के दौड़ रही हैं और उनका रखरखाव भी खराब है। ऐसा ही एक मामला दोपहर 2.4 बजे सामने आया, जब एमसीएच से जच्चा-बच्चा को छोडऩे जा रही एंबुलेंस क्रमांक सीजी 04 एनएस 2884 में गंभीर अनियमितताएं मिलीं।
चालक ने स्वयं कमियों की पुष्टि
महिला को वाहन में बिठाने से पहले एंबुलेंस का दरवाजा ड्रिप ट्यूब से बांधकर खोला गया, क्योंकि उसका लॉक खराब था। वाहन के अंदर स्ट्रेचर का पहिया टूटा हुआ था और चढऩे का पैडल भी रस्सी व तार से बंधा था। हद तो तब हो गई जब एंबुलेंस के अंदर दो टायर भी रखे मिले, जिन्हें चालक ने बताया कि बदलना है। चालक ने स्वयं वाहन की इन कमियों की पुष्टि की।
मई में हुई थी जांच
जिले में कुल 41 एंबुलेंस संचालित होती हैं। पिछले मई माह में जिला अस्पताल में करीब 19 एंबुलेंस का रखरखाव व फिटनेस, दवाइयों और अन्य उपकरणों की जांच की गई थी। इस दौरान कुछ एंबुलेंस में कमियां पाई गईं, जिन्हें सुधार के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, कई एंबुलेंस अब भी बिना फिटनेस के दौड़ रही हैं।
एम्बुलेंस निरीक्षण में मिली थी कमियां
कलेक्टर मिशा सिंह ने अपने कार्यकाल में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में हर माह एंबुलेंस का निरीक्षण करने के निर्देश किए थे। मई माह में 41 में से मात्र 19 एंबुलेंस का ही निरीक्षण स्वास्थ्य विभाग और जिला परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने किया। निरीक्षण के दौरान भी एक एंबुलेंस में दवाइयां और इंजेक्शन पॉलीथिन बैग में अस्त-व्यस्त मिले, कुछ में अग्निशमन यंत्र चालू हालात में नहीं थे। टायर की स्थिति, सायरन व दरवाजों सहित अन्य सुरक्षा मानकों की भी जांच कर कमी पाई जाने पर सुधार के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के टीम में शामिल प्रबंधक और चिकित्सक ने दिए थे।
मई में 19 की जांच कर नहीं दिया ध्यान
कलेक्टर के निर्देशानुसार इन एम्बुलेंस का हर माह फिटनेस टेस्ट होकर उपकरणों, पर्याप्त संसाधनों एवं दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए। लेकिन मई माह में केवल 19 एम्बुलेंस की जांच की गई, इसके बाद अस्पताल प्रबंधक ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। ये अनफिट एम्बुलेंस दिन-रात जिले में दौड़ रही हैं, इनमें से अधिकांश को दोपहर के समय एमसीएच में खड़ा देखा जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में एम्बुलेंस का महत्व
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में एम्बुलेंस की भूमिका अपूर्व है। मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचाना जीवन-रक्षक हो सकता है। खराब एम्बुलेंस, उपकरणों की कमी और लापरवाही सीधे तौर पर मरीजों की जान को जोखिम में डालती है। विशेषकर गंभीर रोगियों, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना पीडि़तों के लिए एम्बुलेंस का फिट और सुसज्जित होना अत्यंत आवश्यक है ताकि उन्हें सुरक्षित और त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके।
इनका कहना है…
जिले में 41 एम्बलेंस संचालित होती है, 19 के करीब परीक्षण हो चुका हैं। बाकि गाड़ी मंगवा रहे हैं, दो शव वाहन की व्यवस्था हो चुकी है। एजेंसी को निर्देशित कर दिया हैं, वाहनों को हैंडल बदलवाए जा रहे हैं।
आशीष चौरसिया, नोडल अधिकारी ट्रांसपोर्ट स्वास्थ्य विभाग
Updated on:
06 Aug 2026 10:44 pm
Published on:
06 Aug 2026 10:42 pm
