
रतलाम में आचार्य रामेश के मुखारविंद से मुमुक्षु पूजा डागा ने की जैन भगवती दीक्षा अंगीकार
रतलाम। समता कुंज में दीक्षा दानेश्वरी आचार्य रामेश के मुखारविंद से गंगाशहर (राजस्थान) की मुमुक्षु पूजा डागा ने जैन भागवती दीक्षा अंगीकार की। इस मौके पर पूजा डागा ने कहा कि एक चंचल, चुलबुली लड़की में वैराग्य का जागरण साधु क्रिया में संतों की अडिगता ने किया। चंदनबाला को जैसे गोचरी में प्रभु महावीर मिले थे, वैसे ही गोचरी में मुझे महासती ताराकुंवर महाराज मिले। उनकी प्रेरणा ने मेरा जीवन बदल दिया। साधु जीवन के जितने आयाम है, उन्हें पाने का आप सभी प्रयास करे। यह अभिनंदन मेरा नहीं, पूरे अखिल भारतीय संघ और आचार्यश्री रामेश का अभिनंदन है। इसे उन्हें ही समर्पित करती हूं।
समारोह की अध्यक्षता अभा साधुमार्गी जैन श्री संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष चम्पालाल डागा ने की। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरके सिपानी, राष्ट्रीय महामंत्री धर्मेंद्र आंचलिया, राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष पारस डागा अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आंरभ में रतलाम श्री संघ के अध्यक्ष मदनलाल कटारिया ने स्वागत भाषण दिया। चातुर्मास संयोजक महेंद्र गादिया ने संबोधित किया। दीक्षार्थी परिचय महेश नाहटा द्वारा दिया गया। समारोह में दीक्षार्थी के पिता सुरेंद्र डागा व माता पुष्पादेवी डागा सहित परिवार के सभी सदस्यों का बहुमान किया गया। दीक्षार्थी अभिनंदन पत्र का वाचन कमल पिरोदिया ने किया। इसके बाद चातुर्मास संयोजक गादिया, श्री संघ अध्यक्ष कटारिया, मंत्री सुशील गौरेचा, उपाध्यक्ष कपूरचंद कोठारी, राजूभाई कोठारी, सहसचिव विनोद मेहता, कनकमल बोथरा, कोषाध्यक्ष सुदर्शन पिरोदिया, सहसंयोजक कांतिलाल छाजेड़ व निर्मल मूणत आदि ने मुमुक्षु बहन का अभिनंदन किया। संचालन सहसचिव मेहता व प्रतिभा ललवानी ने किया। आभार श्रीसंघ के मंत्री गौरेचा ने किया। चातुर्मास संयोजक महेंद्र गादिया ने बताया कि आचार्यश्री की निश्रा में दीक्षा महोत्सव 8 अगस्त को सुबह समता कुंज में होगा। सुबह 9 बजे व्याख्यान होंगे। दोपहर 12.15 बजे दीक्षा होगी। इससे पूर्व 11 बजे चातुर्मास कार्यालय से महानिष्क्रमण यात्रा निकाली जाएगी।
मुमुक्षु पूजा का ऐसे हुआ जीवन परिवर्तन
श्री साधुमार्गी जैन श्री संघ रतलाम द्वारा गोपाल नगर में आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए मुमुक्षु पूजा ने कहा कि उनके जीवन में परिवर्तन की शुरुवात 26 अगस्त 2011 को हुई थी। गोचरी...भोजन लेने के दौरान महासती श्री ताराकुंवर महाराज को देखा। साधु क्रिया में उनकी अडिगता ने बहुत प्रभावित किया। इसके बाद 28 अगस्त को उपाश्रय में मिली प्रेरणा से मैंने संयम मार्ग अपनाने का निर्णय ले लिया। माता-पिता का भी मुझ पर बड़ा उपकार है, उन्होंने कभी इस मार्ग पर जाने से नहीं रोका और हमेशा आगे बढऩे की प्रेरणा दी। मुझे सभी ऐसा आशीर्वाद दे कि में निर्दोष संयम का पालन कर सकू।
आचार्यश्री ने स्वच्छता का संदेश देकर कराया संकल्प
मंगलवार सुबह समता शीतल बाग में व्याख्यान के दौरान आचार्य रामेश ने स्वच्छता की प्रेरणा देते हुए कहा कि स्वच्छता के लिए सरकार के भरोसे नहीं रह सकते। इसके लिए आमजन की भागीदारी आवश्यक है। पूर्व राष्ट्रपति स्व.अब्दुल कलाम के अनुसार यह कहना गलत है कि भारतीय कानून का पालन नहीं करते। विदेशों में जब भी भारतीय जाते है, तो वहां के कानून के मुताबिक स्वच्छता एवं सभी व्यवस्थाओं का पालन करते है। वे देश में आते ही स्वतंत्र हो जाते है। व्यवस्था के प्रति देश में जनजागरण की जरूरत है। आचार्यश्री ने कहा कि सड़क पर कचरा फेंकने से जीवों की हिंसा होती है। इससे सबकों बचना चाहिए। उन्होंने इस मौके पर उपस्थित लोगों को डिस्पोजल का उपयोग नहीं करने एवं सडक़ पर कचरा नहीं फेंकने का संकल्प भी दिलाया।

Published on:
08 Aug 2018 11:59 am

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