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#Ratlam महाशिवरात्रि: अंतिम पहर में धराड़ महाकाल की भस्म आरती

रतलाम। शहर से मात्र 12 किमी दूर प्राचीन धराड़ के महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व पर 52वां सप्तदिवसीय पंच कुण्डात्मक महारुद्र यज्ञ शुरू हो गया। महाशिवरात्रि की रात्रि में 15 पंडितों की ओर से सहस्त्रधारा रूद्राभिषेक कर अंतिम प्रहर में बाबा महाकाल की भस्मआरती की जाएगी।

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महाशिवरात्रि पर्व पर 8 मार्च को शाम को बाबा महाकाल की शाही सवारी निकाली जाएगी। यज्ञ समिति के अध्यक्ष राजाराम पाटीदार ने बताया कि इस वर्ष नगर भोज प्रसादी का आयोजन गीता पाटीदार सुर्या जादूगर की ओर से होगा। यज्ञ आचार्य चन्द्रशेखर जोशी रतलाम के सानिध्य में सम्पन्न होगा तथा भक्त अगले वर्ष के यज्ञ कुंडी के लिए बोली लगाएंगे। 10 मार्च को दोपहर बाद निसन्तान विवाहिता महिलाओं को बाबा महाकाल के आशीर्वाद स्वरूप मुख्य यज्ञ कुंड से पकी खीर पिलाई जाएगी।

परमार कालीन है मंदिर


जिले से करीब 12 किलोमीटर दूर लेबड़ नयागांव फोरलेन पर एक गांव में यह मंदिर है जो कि 12 ईसवी शताब्दी में इस मंदिर का निमार्ण परमार कालीन शासकों ने किया गया था, जिसके प्रमाण पुरातत्व विभाग सर्वेक्षण में भी मिल चुके हैं। 12 ई ईसवी शताब्दियों पुराना मंदिर आज रख-रखाव की कमी के कारण थोड़ा जीर्णशीर्ण हो रहा है, जिसमें आज भी तीन मंजिला मंदिर के गर्भगृह में पंचमुखी महादेव, इसके ऊपर महाकाल विराजित हैं।

शिखर के नीचे है साधना स्थल भी


इसके बाद व शिखर के नीचे साधना स्थल भी बना हुआ है जोकि वर्तमान समय में बंद कर दिया गया है, जिसमें प्राचीन समय में साधु-संत बैठ कर साधना किया करते थे। महाकाल मंदिर के शिखर के दर्शन सडक़ मार्ग से भी होते हैं। गर्भगृह में पंचमुखी शिवलिंग है। उसके ऊपर महाकाल विराजित हैं। यहां मां पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय, हनुमान भी विराजित हैं।

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