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मंदसौर गैंगरेप: सिर्फ एक काला धागा व काले जूते ने खोल दिया आरोपियों का राज

मंदसौर गैंगरेप: सिर्फ एक काला धागा व काले जूते ने खोल दिया आरोपियों का राज

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रतलाम। सिर्फ 15 सेकेंड का सीसीटीवी फुटेज था। दोनों आरोपियों की शकल साफ नहीं आ रही थी, फिर भी मंदसौर पुलिस ने गैंगरेप के प्रमुख आरोपी इरफान को घटना के 24 घंटे के अंदर पकड़ लिया। ये हुआ कैसे, इस बारे में मंदसौर के एसपी बताते है कि हमने इसके लिए काले धागे की मदद ली। काला धागा व काले जूते ने पूरी कहानी हमारे सामने लाकर रख दी।

मंदसौर में 7 वर्ष की स्कूली बच्ची एक सप्ताह पूर्व मंगलवार शाम को स्कूल से अज्ञात लोगों के साथ टॉफी के लालच में पीछे-पीछे चल दी। मासूम पीछे व आरोपी आगे, चेहरा साफ नहीं, बस हाथ व पांव नजर आ रहे थे। वो भी 15 सेकेंड का फुटेज मात्र था। लेकिन इस 15 सेकेंड के फुटेज ने वो कर दिखाया जो देशभर में न होता है। जी हां पुलिस ने एक काले धागे व काले जूते की मदद से गैंगरेप के पहले आरोपी इरफान को घरदबोचा।

खराब था स्कूल का सीसीटीवी

पुलिस के लिए ये खुब आसान न था। स्कूल के मुख्य दरवाजे पर लगा सीसीटीवी कैमरा लंबे समय से खराब पड़ा था। इसके अलावा उसका मुंह भी गलत दिशा की और था। मंदसौर के एसपी मनोजसिंह कहते है कि हमने सबसे पहले इरफान व बाद में आसिफ को पकड़ा। दोनों ने अपना अपराध स्वीकार लिया है। इन दोनों की गिरफ्तारी में सीसीटीवी फुटेज न बल्कि इसके पीछे दो अहम सुराग पुलिस के पास हाथ में आए थे। जूते और हाथ में बंधा काला धागा। एसपी सिंह कहते है कि पुलिस इस मामले की गुत्थी शायद पहली सुलझा लेती अगर मासूम के पिता ने समय रहते थाने में रिपोर्ट लिखवाई होती। पहले तो परिजनों ने स्कूल पहुंचने में देरी की, स्कूल को देरी के बारे में जानकारी नहीं दी फिर स्कूल की छुट्टी के तीन घंटे बाद उसके पिता ने थाने में रिपोर्ट लिखवाई।

सवा करोड़ के लिए किडनेप

पुलिस के अनुसार कुछ समय पूर्व मासूम के पिता ने सवा करोड़ रुपए में भूमि का विक्रय किया था। ये अंदेशा हो रहा था कि हो सकता है कि फिरोती के लिए किडनेप हुआ हो। इस दिशा में पुलिस ने काम करते हुए 15 अलग-अलग पार्टी तलाश में भेजी। लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी पुलिस के हाथ खाली थे। 27 जून की दोपहर को शहर के लक्ष्मण दरवाजे के पास गंभीर रुप से घायल हालात में रगड़ते हुए खुद मासूम जंगल से मुख्य सड़क तक आई। इसके बाद उसने लोगों से मदद मांगी।

शाम से हुई हलचल तेज

जब शहर में लोगों को घटना के बारे में पता चला तो विरोध के स्वर तेज हो गए। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा। मंदसौर 2017 से किसान आंदोलन के समय से गर्म हो रहा है। इस बार पुलिस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। लोगों के विरोध को देखते हुए एसआईटी प्रमुख राकेश मोहन शुक्ल ने शाम को करीब 5 बजे बाद से स्कूल के करीब के सीसीटीवी कैमरे खंगालने शुरू किए। यहां तक की सोशल मीडिया पर भी मदद मांगी। तब शहर के 50 से अधिक लोगों ने अपने-अपने सीसीटीवी कैमरे पुलिस नियंत्रण कक्ष में जाकर दिए। इस बीच ही स्कूल के 150 कदम दूर एक एसआई को एक दुकान के सीसीटीवी कैमरे में मासूम एक व्यक्ति के साथ जाती हुई नजर आई।

मिला पहला सुराग, लेकिन साफ न था

पुलिस के लिए ये फुटेज अंधेरे में एक चिंगारी के समान थे। पुलिस के अनुसार 15 सेकेंड के फुटेज न तो साफ थे न चेहरा नजर आ रहा था, लेकिन इसके बाद भी एक काला धागा व काला जूता पुलिस के लिए बड़ा सबुत था। पुलिस ने जब इन फुटेज को झूम करके देखा तो एक आरोपी के हाथ में काला धागा व पैर में एक महंगी कंपनी के जूते थे। बड़ी बात ये थी कि हाथ का काला धागा व जूते दोनों काले रंग के थे। पुलिस के लिए इतना सबुत काफी था। इसके बाद मंदसौर के करीब दो हजार से अधिक सोशल मीडिया गु्रप में इन सबुत को फैलाया गया।

रात 9 बजे मिली पहली सफलता

रात 9 बजे पुलिस को पहली सफलता तब मिली जब एक मुखबीर ने आकर बताया कि जो फुटेज जारी हुए है, वेसा तो इरफान दिखता है। उसके हाथ में ही काला धागा व जूते भी काले है। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी जब इरफान के घर गए तो तब भी हाथ में काला धागा व पैर में काले जूते ही थे।