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रतलाम। देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने बैंक में काम करने वाले कर्मचायियों को बड़ा तोहफा दे दिया है। ये तोहफा मिलने के बाद अब बैंक कर्मचारी खुश हो गए है। बड़ी बात ये है कि मार्च माह में इस तोहफे की मांग करते हुए हड़ताल की गई थी। इस मांग को अब मंजूर कर लिया गया है।
26 मार्च को ग्रामीण बैंक आफिसर्स फेडरेशन ने अन्य व्यवसायीक बैंक के कर्मचारियों की तरह पेंशन की मांग को लेकर हड़ताल की थी। इस समय रतलाम सहित देशभर में 600 जिलों में 20 हजार 500 शाखा हैं। इनमे 88 हजार कर्मचारी का करते है। इसके अलावा 30 हजार सेवानिवृत कर्मचारी है, जिनको इस पेंशन योजना में लाभ मिलेगा।
ये है पूरा मामला
एमपी स्टेट ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के महासचिव केके गौड़ ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की याचिका क्रमांक 39288-12 को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही इसमे दिए निर्णय को 90 दिन के अंदर लागू करने के आदेश दिए है। ग्रामीण बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों को व्यवसायीक बैंक के कर्मचारियों की तरह पेंशन नहीं मिलती है। इसके लिए वे वर्ष 2012 में लड़ाई लड़ रहे थे।
केंद्र ने रख दी अजीब शर्त
गौड़ ने बताया कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 2011 में बैंकिंग उद्योग में लागू की गई पेंशन योजना को समान रुप से लागू करने की बात कही, लेकिन सरकार ने इसमे शर्त जोड़ी जो बैंक हानी से चल रहे है, उनके कर्मचारियों को पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा पेंशन कोष बनाने की सलाह देते हुए प्रत्येक कर्मचारी से 3 लाख रुपए लेने की बात कर दी। इसके विरोध में कर्मचारी सर्वोच्च न्यायालय गए।
तीन दिन किया था आंदोलन
समान कार्य - समान वेतन की मांग को लेकर ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों ने 26 मार्च से 28 मार्च तक आंदोलन किया था। इस आंदोलन के बीच ही सर्वोच्च न्यायालय ने इन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिया। इस आदेश को ९० दिन में लागू करना है। बैंक से जुडे़ कर्मचारियों के अनुसार वर्तमान मोदी सरकार ने इस आदेश को मानने के लिए स्वीकृति दे दी है। इसके बाद अब ग्रामीण बैंक के सभी कर्मचारियों व पूर्व कर्मचारियों को पेंशन मिला करेगी।
Published on:
30 Apr 2018 01:47 pm
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