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आत्म निर्भर भारत की दिशा में मिल का पत्थर साबित हो रही बिजली कंपनी की एलआरयू

ट्रांसफार्मर का फेल रेट घटाने में उपय़ोगी साबित

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रतलाम. छोटा सा प्रयास, बड़ा हो रहा प्रभाव.... बिजली कंपनी ने आत्म निर्भर भारत की दिशा में काम करते हुए ट्रांसफार्मर यानि डीटीआर की लोकल रिपेयरिंग यूनिट ( LRU ) की स्थापना की। इससे ट्रांसफार्मर के फेल रेट घट रहे है, आपूर्ति में सुधार आता जा रहा है।

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बिजली प्रदाय व्यवस्था में जितनी भूमिका तार, केबल की होती है, उतनी ही भूमिका पावर ट्रांसफार्मर ग्रिड और वितरण ट्रांसफार्मर डीपी की होती है। डीपी गली, मोहल्ले, बाजार, कालोनी आदि स्थानों पर आसानी से देखी जा सकती है। इन डीपी में जब भी छोटी मोटी दिक्कत होती है, तो उन्हें स्थानीय दवाखाने समझे जाने वाली इकाई यानि एलआरयू में लाया जाता है। वहां छोटी मोटी दिक्कत का तीन चार घंटे में समाधान कर दिया जाता है। कंपनी के कर्मचारी उक्त डीटीआर को वहां से निकालकर एलआरयू भेज देते है, उस स्थान पर दूसरा डीटीआर तत्काल लगा दिया जाता है। इस तरह दिक्कत का कम समय में समाधान हो जाता है, वहीं आंशिक खराबी वाले डीटीआर को एलआरयू में समय पर ठीक कर पांच सात घंटे बाद उपयोग में लाने जैसा कर दिया जाता है।

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ट्रांसफार्मर पूरी तरह खराब यानि फेल होने से बच जाता है। बिजली कंपनी के एमडी अमित तोमर के निर्देश पर संचालित लोकल रिपेयरिंग यूनिट के इस कार्य से अब तक कंपनी में इस वर्ष 5000 ट्रांसफार्मरों का रिपेयरिंग कार्य किया जा चुका है। इससे ट्रांसफार्मर का फेल रेट एक फीसदी तक घटाने में मदद मिली है। रतलाम जिले की ही बात करे तो लाखों की आबादी के बिजली प्रदाय के लिए बिजली प्रदाय व्यवस्था में 25 हजार डीटीआर लगे हुए है। फेल दर घटाने के सतत प्रयास जारी हैं। बिजली कंपनी के रतलाम अधीक्षण यंत्री आरसी वर्मा ने बताया कि सभी रतलाम, आलोट, जावरा आदि जगह एलआरयू संचालित है। इनमें प्रतिदिन एक से दो ट्रांसफार्मर रिपेयर होते है। संसाधनों के समुचित उपयोग के साथ ही लास घटाने एवं कंपनी की बचत की दिशा में भी एलआरयू का काम बहुपयोगी साबित हो रहा है।

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