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सफर के दौरान अब जेब में रखो पीकदान, उसी में थूको गुटका-पान

रेलवे ने तैयार की योजना...नागपुर की कंपनी को सौंपा कार्य...हर साल करोड़ों रुपए हुए थे सफाई पर खर्च...

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आशीष पाठक
रतलाम. रेलवे प्लेटफॉर्म से लेकर ट्रेन में पीकदान के अभाव में गुटका व पान थूकने वालों के कारण रेलवे को हर साल इसकी सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। अब रेलवे ने सफाई पर होने वाले इस खर्च को कम करने के लिए एक नवाचार करने जा रहा है। अगले महीने से रेलवे इस प्रकार के यात्रियों को जेब में रखने वाले पीकदान की बिक्री करेगी। इसके लिए पश्चिम रेलवे ने नागपुर की एक कंपनी को पूरा काम सौंप दिया है।

सफर के दौरान अब जेब में रखो पीकदान
तमाम प्रकार के प्रयास और स्वच्छता के लिए चलाए जा रहे लगातार अभियानों के बाद भी ट्रेन से लेकर प्लेटफॉर्म पर गुटका व पान थूकने वालों पर रेलवे नियंत्रण नहीं रख पाई है। इससे रेलवे का स्वच्छता अभियान प्रभावित हो रहा है। करीब 120 करोड़ रुपए पूरे पश्चिम रेलवे में इस प्रकार की गंदगी होने के बाद स्वच्छता पर रेलवे पूरे साल में खर्च करती है। अब इस प्रकार के खर्च को बंद करके पीकदान ही यात्रियों को देने का निर्णय रेलवे ने ले लिया है। इसके लिए नागपुर के एक स्टार्टअप इजीपिस्ट को पूरा काम सौंपा गया है। इस कंपनी के माध्यम से गुटका व पान खाने वाले यात्री बायोडिग्रेडेबल पाउच वाला पीकदान खरीद पाएंगे। इस पीकदान से यात्री कहीं भी अपना पीक चलती ट्रेन से लेकर प्लेटफॉर्म को गंदा किए बगैर पाउच में थूक पाएगा।

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पीकदान का एक से अधिक बार कर पाएंगे उपयोग
रेलवे के एक आला अधिकारी के अनुसार इस बायोडिग्रेडेबल पाउच वाले पीकदान को एक से अधिक बार यात्री उपयोग कर पाएगा। पाउच में थूक जाते ही पत्थर के रुप में जमकर ठोस हो जाएगा। इस पाउच के निर्माण में मेक्रोमेलोक्यूल तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें उपयोग की गई तकनीक से पाउच में जो लार जाएगी वो बैक्टेरिया व वायरस के साथ मिलकर जम जाएगी। ईको फ्रेंडली पाउच मिट्टी में डालने पर यह पौधों की उत्पादन क्षमता को भी बढ़ाएंगे। रेलवे प्रवक्ता खेमराज मीणा ने बताया कि इस प्रकार के पाउच की कीमत रेलवे ने 5 व 10 रुपए रखना तय की है। पश्चिम रेलवे में रतलाम सहित 42 रेलवे स्टेशन पर इस प्रकार की मशीन को लगाना प्रस्तावित है। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।

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