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यह विचार श्रीहुक्मगच्छीय साधुमार्गी शान्त-क्रांति संघ के तत्वावधान में पर्यूषण महापर्व के दौरान गुरुवार को आचार्यश्री विजयराज महाराज ने नमो मंगलम विषय पर प्रवचन देते हुए व्यक्त किए। प्रवचन की शुरुआत में उपाध्यायश्री जितेश मुनि ने आचारण सूत्र का वाचन किया। विद्वान संत रत्नेशमुनि ने आगम का वाचन किया। महासतीश्री इन्दुबाला महाराज ने भी संबोधित किया। उज्जैन से आए कवि हेमंत श्रीमाल ने कविता पाठ किया। इस दौरान सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
जैन धर्म की तीन विशेषता नमस्कार, उपकार, अपेक्षा
उन्होंने कहा कि जैन धर्म की तीन विशेषताएं उसे अलग स्थान दिलाती है। पहली ये चमत्कार नहीं नमस्कार पर बल देता है। दूसरा किसी का तिरस्कार नहीं और सबका उपकार तथा तीसरा किसी की उपेक्षा नहीं अपितु सबकी अपेक्षा इस मूलमंत्र है। नवकार महामंत्र की शुरुआत नमो से होती है और से मंगलम पर खत्म होता है। यदि हमने नमो करना सीख लिया, तो कल्याण हो जाएगा। आचार्यश्री ने भू्रण हत्या को पाप बताते हुए उससे बचने का आव्हान किया।
Published on:
18 Aug 2023 12:04 pm
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