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सिपावरा संगम महादेव: पांच हजार साल पुराना आस्था-इतिहास का केंद्र

रतलाम

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Newsdesk

Aug 18, 2026

datia news

datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

फोटो-आरटी-1803-ड्रोन फोटो चार कॉलम में लगेगा




फोटो-आरटी-1804-मंदिर में बाबा महादेव





आलोट। अंचल से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित सिपावरा संगम महादेव आस्था और इतिहास का महत्त्वपूर्ण केंद्र है। यह वह स्थान है जहां शिप्रा और चंबल नदियों का संगम होता है, और आसपास की मिट्टी अपने भीतर सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए है। प्रकृति की शांति, नदियों की कलकल धारा और हरियाली इसे एक विशिष्ट धार्मिक स्थल बनाती है। दो साल पहले यहां के सौदर्यीकरण की योजना राज्य शासन को भेजी गई, लेकिन अब तक इसकी मंजूरी देना राज्य शासन को जरुरी नहीं लगा है।



पुरातत्व अन्वेषणों से पता चला है कि सिपावरा का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से लेकर परमार और मराठा काल तक फैला हुआ है। वर्ष 1992 में किए गए अन्वेषणों में संगम के समीप विशाल टीले से मानवीय सभ्यता के विभिन्न स्तरों से जुड़े पुरावशेष मिले हैं, जो इस क्षेत्र की पांच हजार वर्ष पुरानी गतिविधियों का प्रमाण देते हैं। संगम तट पर स्थित दीपेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां बड़ी संख्या में मिट्टी के दीपक मिलने से मंदिर का नाम दीपेश्वर महादेव पड़ा।





लोकमान्यता भी है यहां

लोकमान्यता शिव और भस्मासुर की कथा से भी सिपावरा को जोड़ती है। संगम क्षेत्र में नाथपंथी साधुओं की समाधियां भी हैं, जो इसकी अध्यात्मिक परंपरा को दर्शाती हैं। पंडित शिव गिरी गोस्वामी ने बताया कि सिपावरा संगम महादेव क्षेत्र की पहचान केवल मंदिर और संगम तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां वर्षों से धार्मिक परंपराएं चली आ रही हैं। इस ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत के संरक्षण की मांग की जा रही है। अब सिपावरा के स्वरूप को बदलने की तैयारी है।





दो साल पहले भेजी योजना

वर्ष 2024 में इसके विकास के लिए करीब 23 करोड़ रुपए की कार्ययोजना शासन को स्वीकृति के लिए भेजी गई थी। इस योजना का उद्देश्य सिपावरा को धार्मिक एवं पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाना है, जिसमें महाकाल लोक की तर्ज पर पूरे क्षेत्र को शिव आकृति में विकसित करने की परिकल्पना है। इससे सुविधाओं में वृद्धि की उम्मीद है।