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फसल बीमा योजना, किसानों के पीछे अब दौड़ रहे अफसर

- ५० हजार से अधिक किसान अऋणी, फसल बीमा में दिखा रहे रुचि

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रतलाम। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने में अऋणी किसान रूचि नहीं दिखा रहे हैं। विभाग ने विकासखंड स्तर पर लक्ष्य दे रखे है तो सभी कर्मचारियों के साथ कृषक मित्रों को भी मैदान में लगा रखा है। विभागीय अधिकारियों की माने तो जिले में करीब ५०-५५ हजार किसान अऋणी की संख्या में है, जिसकी तुलना में करीब १३८८ किसानों ने ही रूचि लेकर रबी फसल का बीमा करवाया है।

किसानों की माने तो फसल बीमा करा तो लेकिन मुआवजा के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरा समान मिलता है। अतिवृष्टि या ओलावृष्टि होती है, तब बुलाने पर भी बीमा कम्पनी के कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचते और इसी कारण से कई किसान मुआवजे से वंचित रह जाते हैं। कृषक राजेश पुरोहित का कहना है कि प्रति हेक्टेयर ८२० रुपए राशि है वह तो ठीक है, लेकिन के बाद जब मुआवजा मिला वह मुझे पिछले साल ३०० रुपए आया था। विभाग की और से प्रचार-प्रसार की भी कमी रही, जिससे हर किसान योजना समझ नहीं पाया, वहीं बैंककर्मी भी रूचि नहीं लेते। तितरी के कृषक भेरूलाल पाटीदार ने बताया कि बागवानी फसलों पर नुकसानी का भी मुआवजा नहीं मिलता है, इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोडऩे के लिए कृषि विभाग का अमला किसानों को प्रेरित कर रहा है। जिले में करीब ५०-५५ हजार किसान अऋणी है, अब तक १३८८ किसानों का बीमा हुआ है। रबी सीजन में जनवरी और फरवरी में अधिकांशत: अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से नुकसान की संभावना रहती है, इस नुकसानी से कई हद तक बचा जा सकता है।
जीएस मोहनिया, कृषि उप संचालक, रतलाम
बागवानी फसलों में भी मौसम आधारित बीमा है, किसानों अगर केसीसी और लोन बगीचे के नाम पर उठाया है तो बगीचे का बीमा हो जाएगा। जो भी फसल किसान क्रेडिट कार्ड पर दर्शाई गई है उस पर लोन मिला है, लोन अगर गेहंू चना पर ले रखा और बगीचा लगाया है तो उस पर बगीचा फसल दर्ज करवाना होगा, तभी बीमा का लाभ मिलेगा।
एसएस तोमर, उपसंचालक उद्यान, रतलाम