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रतलाम

Watch video : संस्कार पर राजपूत समाज ने कही बड़ी बात…

रतलाम। संयुक्त और संगठित परिवार थे, तब सब ठीक था। आज एकल परिवार हुए तो संस्कार सही शिक्षा और हमारी भारतीय संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। बात से काम नहीं चलेगा हमें निर्णय लेना होगा की संस्कार पाठशाला शुरू हो। सर्वे करें नीति बनाकर छोटे बच्चों से इसकी शुरुआत घरों से करें। यह कहना था राजपूत समाज के प्रबुद्धजनों का।

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शहर के हाथीखाना स्थित श्री राजपूत धर्मशाला में आयोजित पत्रिका टॉक-शो में संस्कार, शिक्षा और संस्कृति पर हावी होती आधुनिकता पर आयोजित टॉक-शो में राजपूत समाज के प्रबुद्ध क्षत्रिय और क्षत्राणियों ने खुल कर अपने विचार रखे। साथ ही घर के बाद धर्मशाला में भी संस्कार-शिक्षा की पाठशाला शुरू करने पर जोर दिया। संचालन श्रीराजपूत नवयुवक मंडल न्यास अध्यक्ष राजेंद्रसिंह गोयल ने किया।

इन्होंने दर्ज कराई उपस्थिति
इस मौके पर चरणसिंह जाधव, किशोरसिंह चौहान, शैलेंद्रसिंह देवड़ा, सुरेंद्रसिंह वाघेला, देवीसिंह राठोर, कमलसिंह राठौर, प्रीति सोलंकी, महिला मंडल अध्यक्ष राजेश्वरी राठौर, पार्षद मनीषा विजयसिंह चौहान, पार्षद धीरजकुंवर राठौर, विजयसिंह चौहान, सुरेशसिंह चावड़ा के अलावा, कविता देवड़ा, मंजुला गेहलोत, निशा वाघेला, ममता चौहान, गायत्री चौहान, भारतसिंह सोलंकी, डाडमसिंह राठौर, महेंद्रसिंह राठोर, राजेशसिंह चौहान, मनोहरसिंह चौहान, बसंती ठाकुर आदि उपस्थित थे।

बच्चों से मोबाइल दूर रखे
बच्चों की नींव व गुरु माता होती है, बच्चों को धर्म-त्यौहारों से जुड़कर रखे संस्कारित शिक्षा प्रदान करें। घर में आध्यात्मिक शिक्षा दें, मातृभाषा को बढ़ावा दें। बच्चों पर अपनी सोच नहीं थोंपे कौशल विकास से जोड़े, कपड़े जरूर पहले पर संस्कार नहीं भूले। बच्चों को निरुत्साहित नहीं करें।