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रतलाम. रतलाम जिले में राष्ट्रीय फ़लोरोसिस निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत फ्लोरोसिस प्रभावित लोगों की जांच किया जाना प्रारंभ कर दिया गया है। इस संबंध में जिला फ्लोरोसिस कंसलटेंट डॉ. एमडी भारती ने बताया कि जिला चिकित्सालय रतलाम लैब में अहमदाबाद के इंजीनियरों द्वारा नया आयन मीटर इंस्टॉल कर दिया गया है। इसके माध्यम से फ्लोरोसिस प्रभावित लोगों की जांच हो सकेगी।
डॉक्टर भारती ने बताया कि रतलाम जिले के करीब 275 ग्राम फ्लोराइड से प्रभावित हैं जिसमें इन ग्रामों के लोगों की जांच के लिए मरीज के यूरिन का सैंपल लिया जाएगा एवं इसमें फ्लोराइड उपस्थित पाए जाने की दशा में जल स्त्रोत की जांच की जाएगी। इस अवसर पर 8 से 10 नमूनों की जांच की गई। नया आयन मीटर इंस्टॉलेशन के समय जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. प्रमोद प्रजापति, लैब टेक्नीशियन दुष्यंत पुरोहित, सुनील कुमावत, थॉमस वर्गीस एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
अबतक 275
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में फ्लोरोसिस बीमारी ने अबतक 275 गांवों प्रभावित कर दिया है। इनमें सर्वाधिक 160 गांव बाजना विकासखंड में है, उसके पश्चात सैलाना विकासखंड में 66 गांव है। आलोट विकासखंड में भी 19 तथा जावरा में 21 गांव फ्लोरोसिस प्रभावित है। रतलाम विकासखंड के 4 तथा पिपलोदा विकासखंड के 5 गांव शामिल है।
विस्तार से जानकारी दी
कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने जिले के फ्लोरोसिस प्रभावित ग्रामों में निवारण के लिए जागरूकता के लिए संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देशित किया। इस दौरान धार से आए रतलाम जिला फ्लोरोसिस निवारण प्रभारी डॉक्टर एमडी भारती ने फ्लोरोसिस पर विस्तार से जानकारी दी।
फ्लोरोसीस के प्रकार
-दन्तीय फ्लोरोसीस में दांतों पर आड़ी लाइनें दिखाई देना
-दांतों में सफेद पीले धब्बे दिखाई देना
-दांतों में भूरा तथा कालापन दिखाई देना
-लक्षण समूह में दिखाई देना अर्थात किसी एक दांत में न होकर दो या दो से अधिक दांतों में दिखाई देना
-दांतों एवं मसूडों के बीच की पकड़ कमजोर होना
-कंकालीय फ्लोरोसिस
कंकालीय फ्लोरोसिस में पैरों की हड्डियों में कमजोरी तथा टेढापन
रीढ़ की हड्डी में अकडन तथा आगे की ओर झुकी हुई कड़ापन
जोड़ों में अकड़न अथवा प्रचंड दर्द
कमर से नीचे अंतिम कूल्हे की हड्डी में दर्द
बच्चों एवं बूढ़े की भांति दिखाई देते हैं
गर्दन में अकड़न
स्थाई विकलांगता
फ्लोरोसिस से बचाव
-जहां तक संभव हो फ्लोराइड बाहुल पानी का सेवन नहीं करें।
-दंतीय फ्लोरोसिस वाले बच्चों को दूध अधिकाधिक मात्रा में सेवन कराएं।
-कैल्शियम, आयरन एवं विटामिन सी एवं डी युक्त खाद्य पदार्थ का अधिक सेवन कराएं जैसे दूध, दही, ऑवला, इमली, हरी सब्जियां, केला आदि।
-घरों में वाटर हार्वेस्टिंग लगया जाए, सुपारी, तम्बाकू, काली चाय, काला नमक, फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट आदि का इस्तेमाल नहीं करें।
फ्लोराइड के स्त्रोत
भूमिगत जल विशेषतः अनुपचारित जमीन का पानी, हैंडपम्प का पानी, नल अथवा कुएं का पानी, काला नमक, सुपारी, काली चाय, नींबू वाली चाय, तम्बाकू, अवसाद दूर करने वाली दवाईयां, कोलेस्ट्रोल कम करने वाली दवाईयां, सोडियम फ्लोराइड टेबलेट रोग प्रतिरोधात्मक दवाएं, टूथपेस्ट सूत्र करने वाले एजेंट, फ्लोराइड युक्त धूल, मिट्टी, खदान, औद्योगिक प्रदूषण है।
Published on:
23 Feb 2022 09:16 pm
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