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शराब की निंदा करने की बजाय दूध के गुणों का प्रचार करो

धर्मसभा: लोकेन्द्र भवन में धर्मसभा में मुनिश्री प्रमाणसागर ने कहा

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शराब की निंदा करने की बजाय दूध के गुणों का प्रचार करो

रतलाम। संत कहते है कि जो खुद बुरा है उसे हर किसी में बुराईयां ही नजर आएगी। आज नकारात्मक बातों का फैलाने का दौर तेजी से चल पड़ा है और सोशल मीडिया के माध्यम से हर पल बुराईयों का फैलाया जा रहा है। हमें दोषारोपण से बचकर हर तरफ अच्छी और सकारात्मक दृष्टि रखना चाहिए। बुराईयों को उजागर करने से उसका प्रचार होता है और अच्छाईयों का बुरा होता है। शराब की निंदा करने की बजाय दूध के गुणों का प्रचार करों। शराब जैसी बुराईयों का यू ही नाश हो जाएगा। अच्छाई सत्य है और बुराई बुरी है। सत्य की सदैव विजय होती है। जीवन का शास्वत सुख प्राप्त करना है तो मन, वचन, काय से बुराईयों को दूर रखो।
यह विचार गुरुवार को चातुर्मास धर्मप्रभावना समिति द्वारा लोकेन्द्र भवन में आयोजित चातुर्मास के दौरान मंगल प्रवचन में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने गुरुभक्तों के मध्य व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि आज हालात ऐसे है कि दोष पराए देखकर, चलत हसत-हसत, खुद के याद ना आवे, जिसका आदि ना अंत। एटिट्यूड सकारात्मक रखो, दोष ग्रहण करने कि प्रवृत्ति से दूर रहो। चार्ज लगाने कि आदत छोड़ो खुद को रिचार्ज करो। दोष देना है तो अपने कर्मो को दो, दोष लगाना है तो अपने कर्मो को लगाओ, तुम्हारा पापोदय दोषी है। ऐसी प्रवृत्ति से नहीं बचोगे तो जीवन का मार्ग प्रशस्त नहीं होगा। अपनी प्रवृत्ति देखो दोषारोपण में कितने माहिर हो, किसी से दोष हो जाए तो शमन करो, उद्घोषक मत बनो। समाज में अच्छा काम करने वालो की चर्चा करने वाले कम है। बुराइयों का ऐसा ढिंढोरा पीटते हो कि लोगों को अच्छाई दिखती ही नहीं इससे ही धर्म कि हानी होती हैं। मुनिश्री गुरुभक्तों समझाया कि ने कहा कि किसी को उपर उठाना है तो पहले अपना स्तर सुधारो, खुद उपर उठोगे तो दूसरो को उपर उठा पाओगे। जीवन में जो काम ताकत से नहीं वह काम सद्भाव से होता है। दोषशमन करके चलो, दोषो को दबाने से पुष्टि नहीं शुद्धि हो सकती हैं। दोष शमन करके ही शोधन हो सकता है यह भाव सबके मन मे जगने चाहिए तभी जीवन सफल होगा।