
53 साल का सफर, 25 रुपए से करोड़ों तक पहुंची भक्तोंं की शृंगार आस्था
रतलाम। शहर का प्राचीन माणकचौक महालक्ष्मी मंदिर आज देश-विदेश तक के भक्तों की जन-जन की आस्था का केंद्र बिन्दू है। करोड़ों के शृंगार से प्रसिद्ध महालक्ष्मी का दरबार अपनी अलग ही पहचान रखता है। यहां के भक्तों की आस्था उस समय परवान चढ़ जाती है, जब दीपोत्सव के दौरान आस्थावान भक्त अपने घर-प्रतिष्ष्ठानों का खजाना खाली कर धन की देवी महालक्ष्मी का शृंगार करते हैं। इसकी शुरुआत आज की नहीं बरसों पुरानी है, जब शहर के प्रबुद्धजनों द्वारा 1962 में ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण की नींव रखी थी। यानि 53 साल पहले महालक्ष्मी का मंदिर मात्र एक ओटला था और चारों तरफ जाली लगी थी और मात्र 20-25 रुपए चढ़ावे में आते थे, आज माता के शृंगार के लिए करोड़ों रुपए चरणों में भक्त अर्पित करते है और पुन: वैभव के रूप में ले जाते हैं।
मंदिर का 1962 में बना था ट्रस्ट
क्षेत्र के व्यापारी मधुसुदन सेवनिया ने बताया 1962 में मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन हुआ, जिसमें प्रमुख रूप से रामनारायण सेवनिया, कन्हैयालाल उग्र, हरिनारायण सेवनिया, अमृतलाल दख, समीरमल गेलड़ा ने एकत्रित होकर रतलाम से बांसवाड़ा तक 64 हजार रुपए का चंदा एकत्रित कर तीन माला मंदिर का निर्माण करवाया। इसके बाद 2004 में नई समिति का गठन हुआ, जिसमें नरेंद्रसिंह परिहार, श्रेणिक सेठ पोहावाला, जीवन कावड़े, कैलाश प्रजापति, विमल गेलड़ा आदि ने जन सहयोग से मंदिर निर्माण को गति प्रदान की।
2009 से भव्य रूप में आया शृंगार
नरेंद्रसिंह परिहार ने बताया कि इस मध्य शासन की और से मंदिर निर्माण के लिए 6 लाख 75 हजार रुपए स्वीकृत किए। 2004 और 2011 के मध्य मंदिर का सम्पूर्ण निर्माण कार्य हुआ। इसी मध्य मंदिर का गेट गेलड़ा परिवार द्वारा लगवाया गया। इसी मध्य 2009 से मातारानी का भक्तों द्वारा किया जाना वाला शृंगार की भव्य रूप लेने लगा। 18 मई 201 को प्राचीन महालक्ष्मी के दरबार में अष्ट महालक्ष्मी विराजमान हुई तो भक्तों की आस्था भी चरम पर पहुंच गई। चिल्लर, नोट, हजारों, लाखों रुपए के बाद करोड़ों के नगद राशि, सोना की केडबरी, चांदी के पाट और माता की स्वर्णआभूषण से शृंगार 2015-16 में विश्व विख्यात हो गया। अब मातारानी के शृंगार दर्शन वंदन के लिए दूर-दूर से भक्त आने लगे। दीपोत्सव के दौरान अब शृंगार की रक्षा के लिए पुलिस के जवान 24 घंटे तैनात रहते और भक्त कतारबद्ध मातारानी के दर्शन वंदन कर धन्य हो रहे हैं।
इस साल मिलेगी केसरिया कुबेर पोटली
मंदिर के संजय पुजारी ने बताया कि पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से हो जाएगी, जो दीपावली के बाद पड़वा तक चलेगी। इस दौरान महालक्ष्मी के अद्भूत शृंगार का दर्शनलाभ भक्त ले सकेंगे। मंदिर में कुबेर पोटली इस वर्ष केसरिया वस्त्र में तैयार की जा रही है। श्रद्धालुओं द्वारा शृंगार सामग्री कुबेर खजाना 31अक्टूबर पुष्य नक्षत्र से ४ नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक और दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक एवं रात ९ से 11 बजे तक लिया जाएगा। इसके साथ इस साल से शृंगार सामग्री, नाम-पता-मोबाइल नंबर के साथ ही पासपोर्ट फोटो भी लगाया जाएगा, ताकि अंत में सामग्री ले जाते समय परेशानी न हो।
Published on:
25 Oct 2018 05:29 pm
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