
Narwai burnt in crime news
जिला दण्डाधिकारी राजेश बाथम के निर्देशानुसार एवं अनुविभागीय अधिकारी रतलाम ग्रामीण त्रिलोचन गौड के मार्गदर्शन में गुरुवार को नरवई जलाने की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल तहसीलदार रतलाम ग्रामीण पिंकी साठे ने टीम गठित कर तहसील रतलाम ग्रामीण स्थित ग्राम शिवपुर में गेहूं की फसल कट जाने के बाद सूखे (खाफे) नरवाई जलाने के सम्बन्ध में समरथलाल और कृष्णा पर धारा 144 का उल्लघंन करने पर दोषियों के विरुद्ध थाना बिलपांक में प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करते हुए धारा 188 के अन्तर्गत प्रकरण पंजीबद्ध करवाया गया है। आज भी कई खेतों को गेहूं कटाई और निकालने के बाद जलाते हुए देखा जा सकता है।
खेत की मिटट्ी में होता नुकसान
- सूक्ष्म जीवों के नष्ट होने के फलस्वरुप जैविक खाद का निर्माण बंद हो जाता है।
- आग लगने के कारण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, भूमि कठोर हो जाती है।
- भूमि की जलधारण क्षमता कम हो जाती है और फसले सूख जाती है।
- खेत की सीमा पर लगे पेड़, पौधे आदि जलकर नष्ट हो जाते हैं।
- पर्यावरण प्रदूषण होता है, वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है।
- कार्बन से नाइट्रोजन व फास्फोरस का अनुपात कम हो जाता है।
- केंचुए नष्ट हो जाते हैं, इस कारण भूमि की उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है।
जलाए नहीं ये करें उपाय
उपसंचालक कृषि नीलमसिंह चौहान ने बताया कि विगत में कुछ सालों से यह देखने में आया है कि गेहूं की 80 प्रतिशत कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से की जा रही है। हार्वेस्टर से कटाई करने के बाद एक फीट ऊंची गेहूं के डंठल खेत में रह जाते हैं, जिससे किसान खेत की सफाई के लिए आग लगाकर जला देते हैं। इसके स्थान पर किसानों को सलाह दी गई है कि गेहूं की डंठलों को रोटावेटर चलाकर बारीक कर सकते हैं। गहरी जुताई करके डंठलों को मिट्टी में मिलावे। जिन किसानों के पास सिंचाई के लिए पानी है वे खेतों में स्प्रिंकलर के माध्यम से पानी देकर 20 मिलीलीटर डी कंपोजर को 200 लीटर में मिलाकर एक एकड़ में छिडक़ाव कर सकते हैं।
Published on:
04 Apr 2024 11:02 pm
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