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#Ratlam रेलवे स्टेशन से जनता खाना गायब, देखें VIDEO

मांगने पर देते हैं खुले में पड़ी बासी सब्जी-पुड़ी, जांच करने तक नहीं जाते रेलवे अधिकारी

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ratlam railway station hindi news

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रतलाम. रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए तत्कालीन समय में रेल मंत्री ममता बनर्जी ने जनता आहार याने की जनता खाने की शुरुआत की थी। मात्र 15 रुपए में पुड़ी, आलु की सब्जी व अचार इसमे मिलता है। दौर बदला तो दलालों ने रेलवे स्टेशन पर कब्जा कर लिया। अब हालात ये है कि रतलाम के रेलवे स्टेशन पर से जनता आहार ही गायब हो गया है। जब स्टॉल पर काम करने वाले वेंडरों से जनता आहार मांगा गया तो जवाब मिला पुड़ी - सब्जी है वो मिल जाएगी, कीमत 30 रुपए। स्वयं वेंडर ही कह रहे है कि तीन माह में कोई बड़ा रेल अधिकारी मनमाने दाम व गायब हुए जनता आहार की जांच करने पहुंचा ही नहीं है।

खाद्य सुरक्षा नियमों की बात करें तो कोई पालन नहीं करता। प्लेटफार्म पर सब्जी पुड़ी के साथ ही समोसे-पोहे आदि खाद्य सामग्री खुले में ही पड़े रहते है, और आने वाले यात्रियों के मांगने पर परोसे जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर 5-6 की, जहां पर स्टॉल लगाकर भोजन और खाद्य सामग्री बेचने वाले वेन्डरों की मनमानी चरम पर है और बुधवार को एक भी दुकान पर जनता भोजन नहीं मिला, परेशान यात्रियों को 30 रुपए में सब्जी-पुड़ी लेना पड़ रही है।

जनता खाना बनकर नहीं आएगा

भय्या, जनता खाना अभी नहीं बनकर आएगा, ये ले जाओ 6 पुड़ी, सब्जी और अचार मिल जाएगा 30 रुपए में, जनता खाना घर से बनकर आता है। आगे तलाश कर लो मिल जाए तो, आगे स्टॉल पर गया तो वहां पूछने पर बताया की पुड़ी सब्जी ले लो...रिपोर्टर ने कहा जनता खाना ही चाहिए, वहां भी वेन्डर कहा कि फिर आगे दुकान पर देख लो। जब आगे वाले स्टॉल पर रिपोर्टर ने जाकर पूछा तो उसे बताया अब आने वाला जनता खाना, अभी पुड़ी सब्जी 30 रुपए में। वेन्डर ने कहा जनता खाना कितना चाहिए एक दो फिर रिपोर्टर ने कहा कि एक तो बोला 10 मिनट बाद आ जाना मिल जाएगा।

हर स्टॉल पर एक सी कहानी जारी

इसके बाद आगे वाले स्टॉल पर वेन्डर से जनता भोजन की मांग की गई तो उसने बताया कि खाना नहीं है, चाय तो कहा 15 मिनट लगेंगे 10 रुपए की आएगी। जनता खाना कहां मिलेगा तो उसने बताया 4 नंबर पर चले जाओ। सब जगह टाइम लगेगा और अच्छा खाना हो तो...किस ट्रेन से जाना है तुमको, जनता खाना मिलनस स्टेशन पर संभव नहीं है, क्योंकि ठंडा हो जाता है ना। सब्जी पुड़ी यहीं मिल जाएगी, जनता भोजन तो बनकर आता था बंद हो गया, नहीं मिलेगा।

छोला पुड़ी ₹ 30 की

पुन: जिस दुकान पर पहले जनता खाना मांगा था, स्टॉल वेन्डर ने बुलाया और कहा कि ये ले जाओं। रिपोर्टर को एक पैकेट दिया और कहा 15 रुपए का है। पैकेट में उसमें आलु सब्जी पर पुड़ी रखकर पैकेट बनाकर दे दिया, पैकेट खोला तो सब्जी में पुड़ी गिली हो चुकी थी। जब रिपोर्टर ने ऐसा पैकेट क्यों बना दिया, पुड़ी गिली हो चुकी है, इसे कैसे खाउंगा, वेन्डर ने कहा ये खाना ऐसे ही आता है। अलग से ले जाना है तो छोला-पुड़ी के साथ मिर्ची आ जाएगी, वह 30 रुपए की। जनता खाने में सब्जी-पुड़ी और एक मिर्ची है। शॉस को पाउच और अचार आता है, वह मेरे पास अभी है नहीं। फिलहाल आपको जरुरत थी तो मैने अभी बना दिया। दूसरे स्टॉल पर ऑटा गुथ रहे वेन्डर से पूछा की जनता खाना मिल जाएगा तो उसने कहा नहीं। चाय तो बोला मिल जाएगी 10 रुपए की है। जनता खाना मिलता नहीं है। छोला पुड़ी ले जाओ वह 30 रुपए की आएगी।