
सभी धर्मों की आस्था का प्रतीक है हुसैन टेकरी शरीफ, दशकों से आ रहे यहां श्रद्धालु
रतलाम। जावरा नगर को पूरे देश तथा सात समन्दर पार तक श्रृद्धा व आस्था के प्रमुख रूप में पहचान दिलाने वाले धार्मिक स्थल हुसैन टेकरी पर इस वर्ष 11 दिनी चेहल्लुम 9 अक्टूबर से 19 अक्टूबर की अवधि में सम्पन्न होना है। चेहल्लुम का मुख्य आयोजन मातम ए खंदक होगा। जिसमें तीन चूल पर से पहले चयनित हुए 63 दूल्हे गुजरेंगे उसके बाद शिया सम्प्रदाय महिलाऐं और पुरुषो के गुजरने के बाद चूल आम जायरीनो ंके लिए खोल दिया जाएगा। चूल से गुजरने का यह सिलसिला की 18 की रात 9 बजे से 19 की अल सुबह तक जारी रहेगा तथा इसी के साथ जायरीन फिर से अपने गन्तव्य की तरफ जाने लगेंगे।
जावरा का यह सर्वाधिक प्रसिद्ध व महत्वपूर्ण धर्मस्थल है जहां पूरे आयोजन के दौरान लाखों जायरीन का आना जाना होता है। मातम ए खंदक में आग पर से नंगे पैर चलने का अवसर कोई गंवाना नही चाहता। यह इमाम हुसैन के प्रति श्रृद्धा व आस्था के प्रदर्शन या अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। जायरीन चूल स्थल तक सुविधा व सहजता में पहुंच सके इस हेतु बांस बल्लियों की मदद से बेरिकेड्स बनाए जाते है। प्रकाश की समूचित व्यवस्था की जाती है। इस आयोजन के दौरान चप्पे चप्पे पर पुलिस प्रशासन के साथ तीसरी ऑंखों की सतत् पैनी व सतर्क नजरों की निगरानी में रहता है। कई बीघा क्ष़़ेत्रफल में आयोजन के चलते काफी समय पहले से तैयारियां शुरू होती है, इसमे टेकरी प्रशासन भी पूरा सहयोग करता है।
6 रोजों पर होती हैं जियारत
रोजे और उनकी महत्ता-टेकरी परिसर में कुल 6 रोजे है। रोजों का निर्माण 1882 से 2006 के मध्य होना बताया जाता है। हर एक का अपना इतिहास है। महत्व है और मान्यता, श्रृद्धा व आदर है। आगतुनक जायरीन की सुविधा व जानकारी के लिए यहां हम संक्षेप में उनसे जुड़ी जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैै। यहां जायरीन इबादत करते हैं, लोभान की धुनी लेते हैं, आका हुसैन के दरबार में मत्था टेक कर मन्नत मांगते हैं, जो पूरी भी होती है। मान्यता है कि भूत-प्रेत और बूरी नजर या बूरी आस्था के असर वालों को यहां से राहत मिलती है।
Published on:
14 Oct 2019 05:37 pm
बड़ी खबरें
View Allरतलाम
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
