10 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Ratlam News : रतलाम जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी की सेवा समाप्त, आधा वेतन राजसात

12 नोटिस बाद भी चौबे परियोजना अधिकारी महेश कुमार चौबे कार्यशैली नहीं सुधरी, जांच में दोषी पाए जाने पर सेवा समाप्त करने का आदेश जारी, रतलाम जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन ने जारी किए आदेश।
2 min read
Google source verification
ias anil kumar damor passes away in vidisha

ias anil kumar damor passes away in vidisha


रतलाम. रतलाम जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन ने परियोजना अधिकारी (वाटरशेड) महेश कुमार चौबे की संविदा सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। उनके जांच अवधि के 50 प्रतिशत मासिक पारिश्रमिक को भी स्थायी रूप से राज्य शासन के पक्ष में राजसात किया गया है। यह निर्णय शासकीय कार्यों में घोर लापरवाही, उदासीनता और पदीय कर्तव्यों के प्रति अनिच्छा के कारण किया गया। इस आदेश के जारी होने के बाद जिला पंचायत में हड़कंपमच गया है। आदेश जारी करने वाली रतलाम जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन सख्त और कड़कअ​​धिकारी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। इस आदेश के बाद दावा किया जा रहा है, आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री आवास में किए जा रहे गोलमाल सहित कमजोर काम करने वाले अन्य संविदा अ​धिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।

रतलाम जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन ने बताया महेश कुमार चौबे को वर्ष 2017 से 2024 तक कुल 42 कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए थे, लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई सुधारात्मक परिवर्तन नहीं हुआ। जिला पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में भी उनके कार्य में सुधार न होने पर संविदा समाप्ति का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। एक स्वतंत्र जांच समिति ने अभिलेखों की जांच के बाद महेश कुमार चौबे को शासकीय कार्य में गंभीर लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपूर्ण नस्तियों के संचालन और शासकीय प्रक्रियाओं के उल्लंघन का स्पष्ट दोषी पाया।

यह गड़बड़ भी की चौबे ने

रतलाम जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन ने बताया इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री अवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के स्वयं के हस्ताक्षर से दिशा-निर्देश जारी करने का गंभीर प्रकरण भी सामने आया था। चौबे ने अपने मासिक पारिश्रमिक रोके जाने के संबंध में उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय कलेक्टर, रतलाम ने आधारहीन पाते हुए निरस्त कर दिया है। नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पूर्णतः पालन करते हुए, उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने के पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन उनके प्रत्युत्तर निराधार एवं अमान्य पाए गए। सक्षम प्राधिकारी ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद यह प्रशासनिक आदेश जारी किया है।