
चंद्रग्रहण का जीव जंतुओं पर क्या पड़ता है असर, बस्तर की नदी में हो रहा शोध
रतलाम। नवरात्रि के समाप्त होने के बाद आने वाली पूर्णिमा को शरद पुर्णिमा कहा जाता है। इस पुर्णिमा को किए गए उपाय कभी भी खाली नहीं जाते है। इस वर्ष 24 अक्टूबर को मनाई जाने वाली ये पुर्णिमा पर खास योग बन रहे है। चंद्रमा की सोलह कलाओं की शीतलता इस रात होती है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस रात चंद्रमा की रोशनी में खीर बनाकर रखने के बाद उसके सेवन से अनेक प्रकार की बीमारी में स्वास्थ्य का लाभ होता है। ये बात रतलाम के पूर्व राज परिवार के ज्योतिषी अभिषेक जोशी ने कही। वे शरद पूर्णिमा 2018 की रात गरीबी दूर करने के लिए किए जाने वाले उपाय के बारे में बता रहे थे।
पहले जाने इसका पोराणिक महत्व
मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण महारास की रचना शुरू करते है। इस बारे में देवीभागवत महापुराण में कहा गया है कि, गोपिकाओं के अनुरोध को देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने चन्द्र से महारास का संकेत दिया, चन्द्र ने भगवान् कृष्ण का संकेत समझते ही अपनी शीतल रश्मियों से प्रकृति को आनंदमय कर दिया। उन्ही किरणों ने भगवान श्रीकृष्ण के चेहरे पर सुंदर रोली कि तरह लालिमा भर दी थी।
कर्ज से मुक्ति पाने का दिन
प्रलय के चार प्रमुख देवता रूद्र, वरुण, यम और निर्रृति का तांडव जब आषाढ़ शुक्ल एकादशी विष्णु शयन के दिन से आरम्भ होता है, तो माता लक्ष्मी भी विष्णु सेवा में चली जाती हैं। जिसके परिणाम स्वरुप देवप्राण कि शक्तियां भी कमजोर होती जाती है और आसुरी शक्तियों का वर्चस्व बढ़ जाता है। इस अवधि में वरुणदेव बाढ़ , सुखा, भूस्खलन रूद्र अनेक प्रकार के ज्वर आदि रोग, यम अकाल मृत्यु और अलक्ष्मी देवी पृथ्वीवासियों को अनेक प्रकार के कष्ट, गरीबी और हानि पहुचाती हैं। इस काल की मुख्य अवधि भादों पूर्णिमा तक होती है।
कमजोर होती है ये शक्तियां
महालय के बाद नवरात्रि में शक्ति आराधना के मध्य जब देवप्राण कि शक्ति बढऩे लगती है, तब आसुरी शक्तियां कमजोर पडऩे लगती हैं। विजयदशमी के दिन व्रत पारण के पश्चात् भगवान् विष्णु की परम प्रिय एकादशी को सबके पूजा आराधना का फल कर्मों के आधार पर दिया जाता है। जिससे पाप कर्मो पर अंकुश लगजाता है, इसीलिए इसे पापांकुशा एकादशी भी कहते हैं। पाप पर अंकुश लगने के बाद पूर्णिमा को माता महालक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन होता है।
लक्ष्मी जी दरवाजे से ही वापस चली जाती
वे घर-घर जाकर सबको वरदान देती हैं, किन्तु जो लोग दरवाजा बंद करके सो रहे होते हैं, वहां से लक्ष्मी जी दरवाजे से ही वापस चली जाती है। तभी शास्त्रों में इस पूर्णिमा को जागर व्रत, यानी कौन जाग रहा है व्रत भी कहते हैं। इस दिन की लक्ष्मी पूजा सभी कर्जों से मुक्ति दिलाती हैं। इस रात्रि को श्रीसूक्त का पाठ, कनकधारा स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम का जाप और भगवान श्रीकृष्ण का मधुराष्टकम् का पाठ करने से गरीबी दूर होती है।
ये करें ज्योतिषीय उपाय
जन्म कुंडली में चंद्रमा कमजोर हों, महादशा-अंतर्दशा या प्रत्यंतर्दशा चल रही हो या चंद्रमा छठवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो चन्द्र कि पूजा और मोती अथवा स्फटिक माला से ऊं सों सोमाय मंत्र का जप करके चंद्र ग्रह के दोष से मुक्ति पाई जा सकती है। जिन्हें लो ब्ल्ड प्रेशर हो, पेट या ह्रदय सम्बंधित बीमारी हो, कफ़ नजला-जुखाम हो आखों से सम्बंधित बीमारी हो वै इस दिन चन्द्रमा की आराधान करके इस सबसे मुक्ति पा सकते हैं।
इस रात चंद्र किरणें अमृत बरसाती हैं
ज्योतिषी जोशी ने बताया कि चंद्रमा कि सोममय रश्मियां जब पेड़ पौधों और वनस्पतियों पर पड़ीं तो उनमे भी अमृत्व का संचार हो गया। इसीलिए इस दिन खीर बना कर खुले आसमान के नीचे मध्य रात्रि में रखने का विधान है। रात में चन्द्र कि किरणों से जो अमृत वर्षा होती है, उसके फल स्वरुप वह खीर भी अमृत सामान हो जाती है। उसमें चंद्रमा से जनित दोष शांति और आरोग्य प्रदान करने क्षमता स्वत: आ जाती है। यह प्रसाद ग्रहण करने से प्राणी मानसिक कष्टों से मुक्ति पा लेता है।
Published on:
21 Oct 2018 11:21 am
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