
shri krishna janmashtami 2018
रतलाम। सभी की सर्व मनोकामना पूरी करने वाले श्री विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण की जन्म तिथि भाद्रपद अष्टमी 2 व 3 सितंबर को मनाई जाएगी। भगवान का जन्म जेल में भाद्रमास की कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ था, इसलिए इनका अवतरण दिवस श्री कृष्ण जन्मअष्टमी के रुप में भारत व दुनिया में मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण के जन्म की राशि विशेष उपाय से पूजन की जाए तो न सिर्फ पे्रम के योग की बाधा दूर होती है, बल्कि लंबे समय से कुंडली में बने हुए संतान जन्म की बाधा भी दूर होती है। ये बात मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिषी एनके आनंद ने कही। वे पैसेल रोड पर भक्तों को श्री कृष्ण जन्मअष्टमी का महत्व व इससे जुडे़ हर राशि के आसान उपाय के बारे में बता रहे थे।
ज्योतिषी आनंद ने कहा कि वर्ष 2018 में 2 सितंबर की रविवार की रात को 8 बजकर 47 मिनट पर अष्टमी तिथि का उदय होगा। ये तिथि 3 सितंबर सोमवार शाम को 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। भारतीय ज्योतिष में जन्मअष्टमी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन राशि अनुसार उपाय या पूजन किया जाए तो संतान प्राप्ति की मनोकामना तो पूरी होती है साथ ही साथ प्रेम में अगर कोईपरेशानी आ रही है तो उस कार्य में भी सफलता मिलती है।
स फूल से करें भगवान की पूजन
रोहिणी नत्रत्र में भाद्रमास की कृष्णपक्ष की अष्टमी को जन्मे कान्हा के पूजन की विशेष विधि है। भगवान के श्रंृगार में फलों का विशेष महत्व है। भगवान कृश्ण अगर प्रसन्न हो जाए तो सर्व मनोकामना पूरी कर देते है। भगवान को वैजयंती के फूल सबसे अधिक पसंद है। इसलिए पूजन में भगवान का श्रंृगार वैजयंती के फूलों से होना चाहिए। भगवान की पूजन में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी भी स्थिति में काले रंग का उपयोग नहीं किया जाए। चंदन की माला व पीले वस्त्र भगवान श्रीकृष्ण को सबसे अधिक पसंद है।
पूजन में चढ़ाएं ये भोग
भगवान श्रीकृष्ण की पूजन में नैवेद्ध या प्रसादी का विशेष महत्व है। आमतोर पर भगवान को दही, माखन-मिश्री का प्रसाद चढ़ाया जाता है। इसके अलावा खीरा, पांच प्रकार के फल, पंचमेवा का प्रसाद भी साथ जरूर हो। सबसे पहले भगवान को पंचामृत से स्नान करवाएं। इसके बाद तुलसी दल अर्पित करें। भगवान की तस्वीर या मुर्ति को चांदी की प्लेट में रखे। भगवान का पालना अगर आपके पास नहीं है तो ये बाजार में कम कीमत में मिलता है। चांदी की प्लेट में पालना को रखें। पालला में भगवान को बिठाए। इसके बाद भगवान का पंचामृत से स्नान करवाने के बाद शुद्ध जल से स्नान करवाए। भगवान को वैजयंती के पुष्प चढ़ाकर माखन व मिश्री का भोग लगाए। भगवान को चंदन का तिलक लगाए। इस दौरान ऊं नमो नारायण व ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का जप करते रहे।
पे्रम के लिए करें ये उपाय
अगर आप को प्रेम में सफलता नहीं मिल रही है तो राशि अनुसार विशेष उपाय करने से लाभ मिलता है। मेष व वृश्चिक राशि वालों को भगवान श्रीकृष्ण को रक्त चंदन लगाना चाहिए। वृष व तुला राशि वालों को श्वेत या सफेद चंदन लगाना चाहिए। मिथुन व कन्या राशि वालों को भगवान को दुर्वा भी चढ़ाना चाहिए व इसके बाद माखन व मिश्री का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। कर्क राशि वाले पे्रम में सफलता के लिए भगवानक को दूध व दही से अभिषेक करें। सिंह राशि वाले भगवान की पूजन पीले केसर व पीले चंदन से करें। धनु व मीन राशि वाले भगवान की पूजन में मोहीी देवी का स्मरण करते हुए पंचामृत से पूजन करें। मकर व कुंभ राशि वाले भगवाल की पूजन में पंचामृत के साथ साथ पंचमेवा भी चढ़ाएं। पूजन में इस बात का विशेष ध्यान रखें की ये रात 11 बजे से 1 बजे तक निंरत चलती रहना चाहिए। इसके लिए मन में लगतार ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जप कार्य में सफलता के लिए करें।
संतान बाधा के निवारण के एेसे करें पूजन
कंडली में संतान सुख को पांचवे भाव से देखा जाता है। अगर पांचवा भाव का स्वामी ६, ८ या १२वें भाव में हो तो संतान देरी से होती है। इसके अलावा ५वें भाव का स्वामी दशम भाव में तब भी संतान देरी से होती है। कई बार कुंडली में संतान के मुख्य कारण भाव पांचवे का संबंध राहु या केतु के साथ होने पर भी समस्या आती है। इसको भारतीय ज्योतिष में पितृ दोष या संतानबाधा दोष के नाम से पुकारा जाता है। अब आपको हर राशि वाले के लिए उपाय बताया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पर रात १२ बजे पूर्व पूजन का सभी सामान को एक थाली में सुविधा अनुसार जमा करें। इसके बाद हाथ में पति व पत्नी जल लेकर संकल्प ले। संकल्प में स्वयं का नाम, गौत्र व मां का नाम का उच्चारण करें। इसमे ये बात का विशेष ध्यान रखे कि पति व पत्नी अपने जन्म के समय के गौत्र का नाम कहे। संकल्प में संतान प्राप्ती के लिए पूजन किया जा रहा इस बात का उल्लेख करें। इसके बाद दीपक जलाए। दीपक जलाने के बाद शुद्ध जल से भगवान को स्नान, फिर पंचामृत से स्नान, फिर शद्ध जल से स्नान कराए। इसके बाद भगवाल को अबीर, गुलाल, कंकु, तुलसी, पंचमेवा आदि चढ़ाए। इसके बाद पुन: शुद्ध जल से स्नान करवाए। इसके बाद पंचामृत से स्नान करवाए। इसके बाद फिर से शुद्ध जल से स्नान करवाए। इसके बाद नैवेद्ध का भोग भगवान को चढ़ाए। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण का संतान गोपाल मंत्र का जाप 108 दिन तक प्रतिदिन 216 बार पति व पत्नी करें। पत्नी जब पांच दिन तक जप करने की स्थिति में नहीं हो तब आगे के दिन बढ़ाकर जप शुरू करें। इसके बाद लाभ होगा।
ये है संतान गोपाल मंत्र
ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।
भोग में चढ़ाएं ये प्रसाद
नटखट बाल गोपाल के लिए 56 भोग तैयार किया जाता है जो कि 56 प्रकार का होता है। भोग में माखन मिश्री खीर और रसगुल्ला, जलेबी, रबड़ी, मठरी, मालपुआ, घेवर, चीला, पापड़, मूंग दाल का हलवा, पकोड़ा, पूरी, बादाम का दूध, टिक्की, काजू, बादाम, पिस्ता जैसी चीजें शामिल होती हैं। अगर आप भगवान को छप्पन भोग प्रसाद में नहीं चढ़ा पाते हैं तो माखन मिश्री एक मुख्य भोग है। आमतौर पर जन्माष्टमी के मौके पर श्रीकृष्ण को माखन मिश्री चढ़ाया जाता है।
Published on:
29 Aug 2018 01:12 pm

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