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पद्यावती पर रोक के सीएम के निर्णय का इस भांजी ने किया विरोध

राजपुत समाज में फिल्म प्रतिबंध निर्णय से प्रसन्नता

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padamavati

रतलाम। संजय लीला भंसाली की प्रदर्शन के पूर्व ही बहुचर्चित हो चुकी हिंदी फिल्म पद्यावती के प्रदर्शन पर मध्यप्रदेश में रोक लगा दी गई है। इस निर्णय से एक तरफ जहां राजपुत समाज सहित करणी सेना में प्रसन्नता है, वही इस फिल्म में मध्यप्रदेश से जुडे़ लोगो में निराशा है व सीएम के निर्णय का विरोध किया है। सीएम के निर्णय का विरोध करने वालों का कहना है कि बगैर फिल्म को देखे, सिर्फ सुनी हुई बात पर विरोध जायज नहीं है व इस निर्णय पर फिर से विचार होना चाहिए।

पद्यावती को मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक दिसंबर को होने वाले विश्व व्यापी प्रदर्शन को फिलहाल टाल दिया गया है। हालाकि इसके प्रोमों व गाने विभिन्न सोशल मीडिया व मनोरंजन वाली चैनलों में आ गए है। प्रदेश में मंदसौर व नीमच जिले से जुडे़ जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री चौहान से फिल्म के प्रदर्शन करने पर रोक लगाने की मांग की थी। इतना ही नहीं, आमतोर पर दो विरोधी विचारधारा वाले छात्र संगठन विद्यार्थी परिषद व एनएसयुआई ने तो रतलाम जिले के जावरा में भंसाली का पुतला ही इस एक मुद्दे पर सोमवार को जलाया।

अपने निर्णय पर विचार करे

इस फिल्म की अनेक विशेषताओं के साथ एक बात ये भी है कि इस फिल्म का बाहुबली की तरह मध्यप्रदेश से करीबी संबध है। फिल्म में डबींग का कार्य करवाने वाली अल्पना संजय उपाध्याय मध्यप्रदेश के रतलाम की है। उनसे जब फिल्म के उनके ही प्रदेश में प्रदर्शन पर रोक के बाद तुंरत प्रतिक्रिया चाही तो कहा की उन्होने भी इस बारे में कुछ देर पूर्व ही टीवी पर देखा है। वे मुख्यमंत्री के इस निर्णय से निराश व हताश है। बेहतर होता की पहले एक बार मुख्यमंत्री फिल्म को देखते। एक बार वे फिल्म को देखते तो रोक के बजाए स्वयं कहते की फिल्म को टैक्स फ्री कर देते है। अब भी समय है, वे अपने निर्णय पर विचार करे।

प्रदेश से एेसे है संबध

बता दे की अल्पना मध्यप्रदेश के रतलाम की है। बाहुबली के भाग एक व दो में हिंदी में लाने में उनका ही बड़ा योगदान रहा है। इस फिल्म को हिंदी में तैयार करवाने में विशेषकर दीपीका के डायलॉग को एक महारानी की तरह बुलवाने में बड़ी मेहनत अल्पना की रही है। अल्पना के अनुसार प्रदेश की अन्य भांजियों की तरह में भी मुख्यमंत्री की भांजी हूं, व अपने मामा से कहना चाहती हूं की वे एक बार पहले फिल्म देखे, फिर कोई निर्णय ले।