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आचार्यश्री ने गुरुवार को तेजा नगर जैन मंदिर के पास ***** चाह, राह बना देती है ***** विषय पर आयोजित एक दिवसीय विशेष प्रवचन में कहा कि भौतिक जीवन में जिस प्रकार से आहार जरूरी है, ठीक उसी तरह से आध्यात्मिक जीवन में प्रवचन जरुरी है। हमारी भूमिका भगवान से जुड़ने की होना चाहिए। यदि मन में प्रभु से मिलने की चाह होगी, तो राह अपने आप बन जाएगी।
स्वीकार करने वाले कम
आचार्यश्री ने कहा कि आज के दौर में होठ का उपयोग ज्यादा होता है और कान का कम, यही बात हर घर में विवाद का कारण बन रही है। गुरु की बात शिष्य, पति की बात पत्नी और सास की बात बहू सुनने को तैयार नहीं है। सुनने वाले तो हजारों है, लेकिन स्वीकार करने वाले कम है, जो सुन सकता है, वह अपने आप को संभाल सकता है।
प्रभु अपने लगने से काम बनेगा
आचार्य श्री ने कहा कि संबंध कभी तेल और पानी जैसे नहीं, दूध और पानी जैसी भूमिका के होना चाहिए। प्रभु से हमारा संबंध आत्मीयता का होना चाहिए। प्रभु सिर्फ अच्छे लगने से नहीं, अपने लगने से काम बनेगा। आचार्यश्री की निश्रा में हुए विशेष प्रवचन में लाभार्थी मोहनबाई सोभागमल तलेरा परिवार रहा। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं के उपस्थित रहे।
Published on:
30 Nov 2023 10:35 pm
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