
video conferencing in railway court
रतलाम। अब तक पटरी पार करने, ट्रेन में पायदान पर बैठने, धुम्रपान करने आदि पर यात्री को लगने वाले दंड के लिए आरपीएफ कोर्ट लेकर आती थी। अब एेसा नहीं होगा। देश में पुणे के बाद रतलाम रेल मंडल में इसकी शुरुआत हो रही है कि अपराधी की पेशी व सजा वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से हो जाए। इसके लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने आरपीएफ को अनुमती दे दी है। इससे अपराधी को लाने-ले जाने में जो टीए बनता था व समय लगता था, उसकी बचत होगी।
अभी होता है ये काम
इस समय अगर कोई यात्री ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर किसी प्रकार का अपराध करता है व आरपीएफ उसको पकड़ती है तो कोर्ट में पेशी होती है। मंडल के जावरा, ढोढऱ, महिदपुर आदि स्थान पर रेलवे कोर्ट नहीं होने की दशा में अपराधियों को रतलाम मुख्यालय लाया जाता है। इसके बाद लिखा-पढ़ी होती है व सुबह हुए अपराध के मामले में शाम तक कोर्ट में पेशी होती है। अगर यात्री पटरी पार कर रहा है तो कोर्ट अपने विवेक पर अपराध की गंभीरता को देखते हुए 100 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक का दंड लगाती है। इससे यात्री के समय का व्यय तो होता है साथ ही जावरा या ढ़ोढऱ स्टेशन से आरपीएफ जवान किसी को लाया है तो उसको भत्ता भी रेलवे को देना पड़ता है।
अपराधी के भागने का डर नहीं
कई बार महिदपुर रेलवे स्टेशन से मंडल मुख्यालय पर पटरी पार करने वाले यात्रियों को लेकर आरपीएफ जवान आते है। इसमे समस्या ये होती है कि आरपीएफ को बल की कमी होने पर अधिक यात्री होने पर लाने में समस्या होती है। इसके बाद कभी-कभी चतुर यात्री आंख में धुल झोककर भागने का भय भी रहता है। वीसी से पेशी होने पर लाने-ले-जाने का समय तो बचेगा साथ ही अपराधी के भागने का भय भी नहीं रहेगा।
यहां से हो रही शुरुआत
मंडल में नीमच-रतलाम व इंदौर-सीहोर सेक्शन से इसकी शुरुआत फरवरी माह से होगी। इसके लिए रेलवे कोर्ट सेक्शन में आने वाले आरपीएफ थाने व पोस्ट सहित चौकी पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए कार्य की शुरुआत हो गई है।
- कुमार निशांत, मंडल सुरक्षा आयुक्त, रतलाम रेल मंडल
Published on:
12 Jan 2019 07:06 am
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