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देखें वीडियो : Ratlam एसपी ने बताया ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने का आसान उपाय

आधुनिक युग में मोबाइल के उपयोग के साथ-साथ लोगों के साथ साइबर अपराध बढ़ने लगे हैं। आपके समझने की शक्ति समाप्त होने पर शुरू होता है हैकर का दिमाग, इसलिए सावधानी हमें स्वयं को रखना जरूरी है।

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Use the SIM number entered in the bank in a mobile with a keypad

Use the SIM number entered in the bank in a mobile with a keypad

रतलाम. हैकर का दिमाग आपके दिमाग से अधिक शक्तिशाली है। जहां आप सोचना बंद करते हैं, वहां वो सोच शुरू करते हैं। ऑनलाइन धोखे से बचना है तो सबसे बेहतर तरीका है कि जो सिम नंबर बैंक में दर्ज है, उसको कीपैड वाले मोबाइल में उपयोग करें। यह कहना है रतलाम पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी का। आईपीएस तिवारी से पत्रिका नेे ऑनलाइन अपराध को लेकर विस्तार से बात की।

पत्रिका : लगातार ऑनलाइन अपराध बढ़ रहे है, बचाव का सबसे बेहतर तरीका क्या है?

आईपीएस तिवारी : सबसे बेहतर है जो सिम नंबर बैंक खाते में दर्ज है, उसको कीपैड वाले मोबाइल में उपयोग कीजिए। वैसे भी इन दिनों हर व्यक्ति कम से कम दो मोबाइल रखता है, ऐसे में एक नंबर कीपैड वाले मोबाइल में हो तो ऑनलाइन अपराध से बचाव आसान है।

पत्रिका : यह पता चले कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हो गए है, तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?

आईपीएस तिवारी : सायबर धोखाधड़ी होने पर सबसे पहले अपने बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके बैंक से सभी भुगतान पर रोक लगवाए। इसके बाद पुलिस को इस बारे में सूचना दी जाए।

पत्रिका : यह देखने में आ रहा है कि ऑनलाइन हेल्पलाइन नंबर से भी धोखाधड़ी हो रही है?

आईपीएस तिवारी : यह सही है, इससे बचाव के लिए जरूरी है कि जो एटीएम आप उपयोग करते है, उसके पीछे ही हेल्पलाइन नंबर रहता है। उसमें नहीं है तो बैंक की पासबुक में नंबर लिखा होता है, इसलिए ऑनलाइन हेल्पलाइन नंबर की तलाश मत कीजिए।

पत्रिका : इस समय सबसे अधिक ऑनलाइन अपराध किस तरह के हो रहे है?

आईपीएस तिवारी : इस समय बूस्टर डोज से लेकर कोरोना वैक्सीन लगवाई या नहीं, इस सवाल को लेकर ओटीपी दिए जा रहे हैं। इसके जाल में कुछ लोग रतलाम में भी आए हैं। ओटीपी देते ही इसके बाद आपको पता भी नहीं चलता और बैंक खाता साफ हो रहा है। यह समझ ले कि बूस्टर डोज या वैक्सीन को लेकर सवाल - जवाब नहीं किए जा रहे है।