16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मौसम अलर्ट, जाने पाला पड़ऩे से पहले के लक्षण

रात पारा 4.8 डिग्री सेल्सियस, केवीके वैज्ञानिकों ने किया किसानों को अलर्ट, करे ये उपाय

2 min read
Google source verification
मौसम अलर्ट, जाने पाला पड़ऩे से पहले के लक्षण

मौसम अलर्ट, जाने पाला पड़ऩे से पहले के लक्षण

रतलाम। नया साल जनवरी माह की सबसे सर्द रात गुरुवार की रही, जब रात का तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। ठिठुरन भरी रात के साथ शीतलहर का असर शुक्रवार सुबह से रात तक देखा गया। शहरवासी ऊनी वस्त्रों से सिर से लेकर पैर तक अपने-आप को सुरक्षित करते देखे गए। तापमान में आई अचानक गिरावट के साथ ही कृषि विशेषज्ञ और वैज्ञानिकों के दल ने ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर फसलों की स्थिति देखी, लेकिन अब तक पाले जैसी शिकायत कहीं से प्राप्त नहीं हुई। वैज्ञानिकों की माने तो पाले पडऩे के पहले सायंकाल आसमान साफ होता है, हवा शांत हो एवं तापमान में कमी के साथ गलावट बढ़ रही हो तो तय मान लें कि उस रात पाला पडऩे वाला है।

लगातार तापमान में आ रही गिरावट
शाम होते शहरवासी चौराहों, मंदिर परिसर, अस्पताल में अलाव जलाकर सर्दी से बचने के प्रयास करते नजर आए। पांच दिन में दिन का तापमान 6.1 डिग्री तक लुढ़क गया, जबकि रात के तापमान में उतार चढ़ाव बना हुआ है।8 जनवरी को रात का तापमान जहां 10.4 डिग्री सेल्सियस था, गुरुवार की रात 4.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम प्रेक्षक महेशकुमार शर्मा ने बताया कि दिन का तापमान 0.1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ पारा 22.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जबकि रात का तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ 4.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया।

कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अमला खेतों पर
कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा जावरा के वैज्ञानिक डॉ सर्वेश त्रिपाठी ने बताया कि पाले से बचाव हेतु ग्लूकोज का उपयोग अत्यंत प्रभावी उपाय है। खडी फसल पर 25 ग्राम ग्लूकोज प्रति पम्प की दर से छिडकाव करें। यदि फसल पाले की चपेट में आ गई हो तो तुरंत 25 से 30 ग्राम ग्लूकोज प्रति पम्प 15 लीटर पानी, की दर से प्रभावित फसल प्रछेत्र पर छिड़काव कर दें । तापमान 4 डिग्री तक पहुंचने पर ग्राम सादा खेड़ी, बडायला चौरासी का भ्रमण किया गया। अभी पाला का कोई प्रकोप नहीं है, किसान भाई पाला से बचाने का उपाय करें। इसी प्रकार एसडीओ कृषि एनके छारी एवं महेंद्र गौर ने जावरा, पिपलौदा एवं रतलाम ब्लॉक के गांव सादा खेड़ी, बड़ायला चौरासी एवं जामथून गांव में चना, अलसी, गेहूं, मैथी एवं लहसुन के खेतों का भ्रमण कर पाला एवं कीट व्याधियों की स्थिति का मुआयना किया। अभी पाले से नुकसान देखने को नहीं मिला, परंतु किसान भाइयों को पाले से बचाव हेतु सावधानी रखनी होगी।

- संवेदनशील फसलें
पाले के प्रति अति संवेदनशील फसल अरहर, मसूर, मटर, टमाटर, बैगन एवं आलू है।
बचाव के लिए उपाय
-सर्वप्रथम हल्की सिंचाई करें तथा रात 10 बजे के बाद खेत के उत्तर एवं पश्चिम दिशा की मेडों पर धुंआ करे।
-सल्फर डस्ट 08 से 10 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से खेत में भुरकाव करे।
-थायो यूरिया 15 ग्राम प्रति पम्प 15 लीटर पानी, अथवा 150 ग्राम 150 लीटर पानी के साथ प्रति एकड़ की दर से खड़ी फसल पर छिड़काव करे ।
-म्यूरियट आफ पोटैश 150 ग्राम प्रति पम्प 15 लीटर पानी अथवा 1.5 किग्रा प्रति एकड की दर से 150 लीटर पानी के साथ छिडकाव करें।
- तनु सल्फ्यूरिक अम्ल 15 मिली प्रति पम्प 15 लीटर पानी, अथवा 150 मिली को 150 लीटर पानी में सावधानी पूर्वक घोल बनाकर खडी फसल पर छिड़काव करें