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Winter advisory -शीत ऋतु एडवायजरी जारी: रखें अपने स्वास्थ्य का ध्यान

रतलाम। शीत ऋतु में वातावरण का तापमान अत्याधिक कम होने शीतलहर के कारण मानव स्वास्थ पर अनेक विपरीत प्रभाव जैसे सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़े में संक्रमण, हाईपोथर्मिया, अस्थमा, एलर्जी होने की आंशका बढ़ जाती है, इसे समय पर नियंत्रण न किया जाए, उस स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है।

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सीएमएचओ डॉ. आनंद चंदेलकर ने कहा कि उक्त प्रभावों से पूर्व बचाव के लिए समयानुसार उचित कार्यवाही की जाने की स्थिति में प्राकृतिक विपदा का सामना किया जा सकता है। यदि किसी स्थान पर एक दिन या 24 घण्टे में औसत तापमान में तेजी से गिरावट होती है, एवं हवा बहुत ठंडी हो जाती है, उस स्थिति को शीत लहर कहते है।

मौसम का रखें ध्यान


सीएमएचओ डॉ. चंदेलकर ने बताया कि शीत लहर की आंशका होने पर स्थानीय मौसम पूर्वानुमान का ध्यान रखें, ताकि यह पता चल सकें कि आगामी दिनों में शीत लहर की संभावना है या नहीं। शीत ऋतु में मौसम के परिवर्तन हेाने से वातावरण का तापमान कम हो जाता है, जिससे विभिन्न प्रकार के रोग जैसे- खासी, बुखार होने की संभावना रहती है। ऐसे वस्त्र जिनमें कपड़े की कई परते होती है, वह शीत से बचाव के लिए अधिक प्रभावी होते है।

शीतलहर के सम्पर्क में आने के लक्षण


डॉ. चंदेलकर ने बताया कि शीत लहर के संपर्क में आने पर शीत से प्रभावित अंगों के लक्षण जैसे कि संवेदनशून्यता सफेद अथवा पीले पड़े हाथ एवं पैरों की उंगलियां कान की लौ तथा नाक की ऊपरी सतह का ध्यान रखें। अचेतावस्था में किसी व्यक्ति को कोई तरल पदार्थ न दें। शीत लहर के अत्यधिक प्रभाव से त्वचा पीली, सख्त एंव संवेदनशून्य हो सकती है, तथा लाल फफोले पड़ सकते है। यह एक गंभीर स्थिति होती है जिसें गैंगरीन भी कहा जाता है। यह अपरिवर्तनीय होती है। अत: शीत लहर के पहले लक्षण पर ही तत्काल चिकित्सक की सलाह लें। प्रभावित अंगों को तत्काल गर्म करने का प्रयास किया जाए।


आवश्यक होने पर ही घर से बाहर रहें


अत्याधिक कम तापमान वाले स्थानों पर जाने से बचे अन्यथा शरीर के कोमल अंगों में शीतदंश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। शीत से प्रभावित अंगों को गुनगुने पानी से इलाज करें। इसका तापमान इतना रखें कि यह शरीर के अन्य हिस्से के लिए आरामदायक हों। कंपकंपी, बोलने में दिक्कत, अनिंन्द्रा, मांसपशियों के अकड़न सांस लेने में दिक्कत/ निश्चेतना की अवस्था हो सकती है। हाईपोथर्मिया एक खतरनाक अवस्था है, जिसमें तत्काल चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता है। शीत लहर/हाईपोथर्मिया से प्रभावित व्यक्ति को तत्काल नजदीकि अस्पताल में चिकित्सीय सहायता प्रदान कराएं। अत: आवश्यक होने पर ही घर से बाहर रहें। शीत से होने वाले रोग के लक्षणों के उत्पन्न होने पर तत्काल स्थानीय स्वास्थ कर्मियों या डॉक्टर से परामर्श करें।

इन बातों का रखे ध्यान

- भोजन, पानी, चार्जर, प्रकाश और साधारण दवाएं तैयार रखे।
- ठंडी हवा रोकने के लिए दरवाजे तथा खिड़कियों की ठीक से बंद रखें।
- बिस्तर, रजाई, कंबल, स्वेटर आदि वस्तुओं का पूर्व से इंतजाम करें।
- यथासंभव कुछ अतिरिक्त गर्म कपड़ों का भी भन्डारण किया जाए।
- सिर, गर्दन, कान, नाक, हाथ और पैर की पर्याप्त रूप से ढकें।
- फेफड़े में संक्रमण से बचाव के लिए मुंह तथा नाक ढक कर रखें।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के लिए विटामिन सी, ताजे फल व सब्जियां खाए।