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चर्म रोग से दूर करती है योगिनी एकादशी, ये करने से होगा लाभ, राशि अनुसार करें उपाय

रतलाम। संसार में करीब-करीब हर मनुष्य को कुछ न कुछ बीमारी होती है। बेहतर खानपान के अभाव व लगातर बढ़ रहे पर्यावरण के चलते इस समय चर्म रोग बढ़ रहा है। अनेक लोग इस प्रकार के मिलते है जो कहते है कई दवाओं का उपयोग किया, अनेक डॉक्टर बदले लेकिन लाभ नहीं हुआ। इस बार 29 जून को योगिनी एकादशी 2019 आ रही है। इस दिन किए गए धर्म से स्कीन प्राब्लम ठीक होती है व दवा काम करना शुरू कर देती है। ये बात रतलाम के प्रसिद्ध ज्योतिषी अभिषेक जोशी ने कही। वे भक्तों को नक्षत्रलोक में एकादशी के महत्व के बारे में बता रहे थे। यह भी पढे़ं -आज ये करें उपाय: शनि की ऐसे करें आराधना, मिलेगी सफलता

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योगिनी एकादशी व्रत 2019

योगिनी एकादशी व्रत 2019

भारतीय पंचाग अनुसार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए योगिनी एकादशी करने का विधान है। इस साल यह तिथि 29 जून 2019 को पड़ रही है। श्री विष्णु ने मानव कल्याण के लिए अपने शरीर से पुरुषोत्तम मास की एकादशियों को मिलाकर कुल छब्बीस एकादशियों को प्रकट किया है।

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भारतीय मास अनुसार कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आने वाली इन एकादशियों के नाम और उनके गुणों के अनुसार ही उनका नामकरण भी किया गया। सभी एकादशियों में नारायण समतुल्य फल देने का सामर्थ्य है। ये सभी अपने भक्तों की कामनाओं की पूर्ति कराकर उन्हें विष्णु लोक पहुंचाती हैं। इनमें योगिनी एकादशी तो प्राणियों को उनके सभी प्रकार के अपयश और चर्म रोगों से मुक्ति दिलाकर जीवन सफल बनाने में सहायक होती है।

पीपल की पूजा का भी है महत्व

योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पीपल के वृक्ष की पूजा का भी विधान है। साधक को इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की मूर्ति को ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए स्नान कराना चाहिए। इसके बाद भगवान श्री विष्णु को वस्त्र, चन्दन, जनेऊ, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य, ताम्बूल आदि समर्पित करके आरती उतारनी चाहिए। पद्म पुराण के अनुसार योगिनी एकादशी समस्त पातकों अर्थात् पापों का नाश करने वाली है। यह संसार सागर में डूबे हुए प्राणियों के लिए सनातन नौका के सामान है। यह देह की समस्त आधि-व्याधियों को नष्ट कर सुंदर रूप, गुण और यश देने वाली है।

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ये करने से होगा लाभ

मेष राशि वाले पीपल के पेड़ पर दूध, वृषभ राशि वाले पीले फुल, मिथुन राशि वाले तेल का दीपक, कर्क राशि वाले पानी, सिंह राशि वाले चंदन, कन्या राशि वाले मिठाई, तुला राशि वाले मिठा दूध, वृश्चिक रााशि वाले गेहूं, धनु राशि वाले पीले रंग की मिठाई, मकर राशि वाले दीपक के साथ आटे में शक्कर मिलाकर, कुंभ राशि वाले मावा, मीन राशि वाले सफेद रंग की मिठाई पीपल पर चढ़ाए तो लाभ होगा।

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ये है इस एकादशी की कथा

इस एकादशी के सन्दर्भ में भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को एक कथा सुनाई थी, जिसमें राजा कुबेर के श्राप से कोढ़ी होकर हेममाली नामक यक्ष मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा। ऋषि ने योगबल से उसके दु:खी होने का कारण जान लिया और योगिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी।

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यक्ष ने ऋषि की बात मान कर व्रत किया और दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक चला गया। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी। अत: इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है, ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत हो सके।