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बदली जीवनशैली में माता-पिता को व्यस्त पा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं बच्चे...
17/09/2017 को बेंगलूरु के तीन किशोर दोस्तों ने अपने-अपने घर के गैराज से तब कारें निकालीं, जब कोई उन्हें देख नहीं रहा था। एक्सप्रेसवे पर पहुंच कर उन तीनों ने रेस लगा दी। एक मिनी-ट्रक सामने आ गया। 17 साल के अरफान की कार उससे टकरा गई। तेज गति से भाग रही कार एक्सिडेंट में बुरी तरह क्षतिग्र्रस्त हो गई। बाकी दो दोस्तों की उम्र 16 साल थी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ केस दर्ज किया और उनके अभिभावकों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ी। उनसे बार-बार सवाल पूछा गया कि आप अपने बच्चों का ध्यान क्यों नहीं रखते हैं?
अब नजर डालते हैं प्रद्युम्न हत्याकांड के आरोपी पर। पढऩे से ज्यादा उसका मन पियानो बजाने में लगता था। वह परीक्षाएं और पैरेंट्स टीचर मीटिंग टलवाना चाहता था। हो सकता है कि अच्छे नंबर लाने या कक्षा में अच्छे प्रदर्शन का उस पर जरूरत से ज्यादा दबाव हो। नई आधुनिक जीवनशैली में माता-पिता इतने उलझे हैं कि अपने बच्चों के लिए उनके पास बिल्कुल भी वक्त नहीं है।
बच्चों के सामने नशा करने से बचें!
इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने माता-पिता की जीवनशैली के उनके बच्चों पर असर विषय पर एक अध्ययन किया। इसमें 21000 लोगों को शामिल किया गया। बच्चे अपने माता-पिता की जीवनशैली और रहन-सहन को अपना लेते हैं।
समान जीवनशैली के कारण बच्चों को भी अपने माता-पिता जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। इसमें मोटापा शामिल है।
जिन बच्चों के माता-पिता उनके सामने धूम्रपान और दूसरे नशे करते हैं, उनके बच्चों में भी बड़े होने पर ये लत पार्इं जाती हंै।
धूम्रपान करने वाली माताओं की लड़कियों में बड़े होकर धूम्रपान की लत होने की आशंका ज्यादा रहती है।
बच्चों को ज्यादा-से-ज्यादा समय दें
व्यस्त माता-पिता बच्चों को आया, क्रैच के भरोसे छोड़ देते हैं। इस वजह से बच्चों को प्रेम भरा स्पर्श व सही परवरिश नहीं मिल रही। क्षतिपूर्ति के लिए उन्हें कंप्यूटर-लैपटॉप, मोबाइल जैसे कीमती तोहफे पकड़ा दिए जाते हैं। इस वजह से बच्चा जब बड़ा होता है, तो रिश्ते-नातों को व्यापार की तरह डील करता है। माता-पिता के घर से बाहर रहने, पार्टी करने को ही जीवन समझता है। ऐसे बच्चे पढ़ाई में कमजोर होते हैं, अपराध की तरफ जाते हैं और अपने जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं।
ऐसे बदली अभिभावकों की जीवनशैली
- माताएं पहले की तुलना में ज्यादा कामकाजी और सामाजिक रूप से ज्यादा सक्रिय हो गई हैं।
- पति-पत्नी के बीच बढ़ते झगड़े और तलाक बच्चों पर बुरा असर डाल रहे हैं।
- बच्चों पर बहुत ज्यादा पढ़ाई का दबाव डाला जा रहा है।
- तनाव में माता-पिता गुस्सा बच्चों पर निकाल रहे हैं।
- वॉट्सऐप, फेसबुक में ज्यादा समय व्यतीत।
बच्चों पर पड़ रहा है बुरा असर
- मोबाइल, टीवी, वीडियोगेम में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। देखने वाला कोई नहीं है कि वे क्या कर और देख रहे हैं।
- ध्यान आकर्षित करने के लिए अजीबोगरीब हरकतें करते हैं या गलत व्यक्ति से जुड़ जाते हैं।
- अभिभावकों की जीवनशैली का बच्चों के जीवन पर 40 प्रतिशत प्रभाव पड़ता है। इससे उनका भविष्य निर्धारित होता है।
Published on:
24 Nov 2017 11:29 am
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