
family
बच्चे के जन्म के पहले साल में पारिवारिक परिवेश बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चे के पहले साल में ही घर के माहौल से इस बात का निर्धारण हो जाता है की बच्चा किस तरह भावनात्मक रूप से विकसित होगा। शिशु के सकारात्मक मानसिक विकास में इस माहौल का महत्वपूर्ण योगदान है। पारिवारिक तंत्र का बच्चे के विकास पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है, विशेषकर पहले कुछ सालों में बच्चे का मां के साथ किस तरह का रिश्ता रहा। मां के साथ रहकर ही शिशु परिवार के महत्व जान पाता है। इस दौरान बच्चे में भावनात्मक विकास भी होता है और वह माहौल में अपने आप को ढालना सीखता है।
अचेतन स्तर पर करते हैं भावनाओं का सामना
फिनलैंड की युनिवर्सिटी ऑफ टैंपर में 10 साल के बच्चों पर एक अध्ययन किया गया। इसमें विभिन्न प्रकार के पारिवारिक माहौल से आए 79 बच्चों को लिया गया। अध्ययन के दौरान बच्चों को खुश मिजाज और नाराज चेहरे वाली तस्वीरें दिखाई गईं। इसके नतीजों से पता चला की बच्चे अपनी भावनाओं का सामना स्वचालित तरीके से अपने अचेतन स्तर पर करते हैं।
अभिभावक घर के माहौल पर ध्यान दें
आपका बच्चा स्वस्थ माहौल में पले, इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि घर में बच्चा है तो आपसी मनमुटाव की बातें उसके सामने न करें। अपने झगड़ों को किसी अलग जगह पर ही सुलझाएं। आपके मनमुटाव का असर बच्चे पर नहीं पडऩा चाहिए।
मां-बाप के बीच आपसी संबंध
जो बच्चे ऐसे परिवारों से आए जहां मां-बाप के बीच मधुर संबंध रहा और जहां बच्चे को भरपूर प्यार मिला। जब इन बच्चों को नाराज चेहरे वाली तस्वीरें दिखाई गईं तो कुछ सेकेंड के लिए इसका असर बच्चे पर हुआ। मगर तुरंत ही बच्चे ने ध्यान उस तस्वीर से हटा लिया और पूरी तरह से उसके बारे में भूल गया। बच्चे की यह काफी अच्छी कोशिश थी। यह इस बात को दर्शाता है की बच्चे में नकारात्मक माहौल का सामना करने की क्षमता है और वो ऐसे माहौल में भी सकारात्मक सोच बनाए रख सकता है।
निष्कर्षों में पाया गया कि...
उन परिवारों के बच्चे जहां माता-पिता के बीच संबंध बहुत मधुर नहीं हैं, जब उन बच्चों को नाराज चेहरे वाली तस्वीरें दिखाई गईं तो भी कुछ समय में ही बच्चे ने अपने ध्यान को वहां से हटा लिया। मगर फिर भी बहुत देर तक यह बात बच्चे के मन में बनी रही। यह इस बात को दर्शाता है कि वो बच्चे वो ऐसे पारिवारिक माहौल से आए हैं, जहां पर मां-बाप संबंध अच्छे नहीं। नतीजन बच्चे नकारात्मक माहौल का सामना करने में सक्षम नहीं हैं। यानी मां-बाप के संबंध शिशु के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
Published on:
18 Sept 2017 12:37 pm
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