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यह जरूरी नहीं कि दोस्त कोई आपके घर के बाहर का हो, वह आपके परिवार का कोई भी सदस्य हो सकता है या फिर सभी सदस्य भी। कुछ ऐसे ही विचार अपने ब्लॉग पर लिखे हैं संजय कुमार चौरसिया ने...
हम सभी के जीवन में दोस्त की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती हैं! सच्ची दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो इंसान के किसी भी रिश्ते पर भारी पड़ सकती है। आजकल तो फेसबुक, व्हाट्सएप हमारे सभी रिश्तों पर भारी पड़ रहे हैं। आजकल हमारी दोस्ती अपनों से कम इन मशीनी उपकरणों से ज्यादा है और इसका कारण भी हम ही हैं शायद, और निवारण भी, किन्तु क्या ये संभव है? नहीं, क्योंकि हमने अब इसे अपनी दिनचर्या और जरूरत का साधन मान लिया है! आज इस स्वार्थी दुनिया में हम सिर्फ अपने मतलब के लिए दोस्त चुनते हैं! क्योंकि हमारे अंदर से अपनेपन का भाव धीरे-धीरे क्षीण होता जा रहा है। अगर दोस्ती के मायने समझो तो बहुत कुछ है, और यदि नहीं समझे तो कुछ नहीं।
रिश्ता माता-पिता का हो या भाई-बहन का, रिश्ता पति-पत्नी का हो या मां-बेटे, मां-बेटी या पिता-पुत्र का ये अमिट रिश्ते हैं। किंतु कई बार यह भी देखा गया है सच्चे दोस्त को इन सब रिश्तों में कहीं ज्यादा मान-सम्मान दिया गया है। इसलिए इस रिश्ते को सबसे बड़ा माना जाता है! यह जरूरी नहीं कि, दोस्त कोई आपके घर के बाहर का हो, वह आपके परिवार का कोई भी सदस्य हो सकता है या फिर सभी सदस्य भी। एक मां अपने बच्चे की सबसे अच्छी दोस्त होती है जो उसका हमेशा ध्यान रखती है, उसको गलत राह पर जाने से रोकती है और उसमें अच्छे संस्कारों का बीज रोपित करती है।
एक पिता भी अपने बच्चे का अच्छा दोस्त होता है वह अपने बच्चे को घर के बाहर की दुनिया के बारे में बताता हैं। बुरी ताकतों से लडऩे और सही दिशा में कार्य करने की सीख प्रदान करता है और साथ साथ उन सभी बुराइयों से उन्हें बचाता है जो उसके बच्चे के वर्तमान और भविष्य लिए हानिकारक हैं। हमारे पास परिवार के सदस्यों के अलावा बाहर की दुनिया में भी अच्छा दोस्त होना आवश्यक होता है। सच्चा मित्र किसी जीवनदायक अमृत से कम नहीं है। क्या आप सच्चे मित्र बनेंगे? क्या आप सच्ची मित्रता निभाएंगे ? क्या आप सच्ची मित्रता का मोल चुकाएंगे? यदि हां, आप कहलाएंगे सच्चे मित्र! आगे बढि़ए और निभाइए सच्ची मित्रता का फर्ज और महसूस कीजिए सच्ची अनुभूति।
Published on:
29 Sept 2017 12:29 pm
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