1 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आखिरकार हम इतने गुस्से में क्यों रहने लगे हैं?

बदलती जीवनशैली में इसका समाज के साथ हमारे रिश्तों के साथ-साथ निजी रिश्तों पर पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

3 min read
Google source verification

image

Amanpreet Kaur

Sep 29, 2017

anger

anger

समाज में ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। बदलती जीवनशैली में इसका समाज के साथ हमारे रिश्तों के साथ-साथ निजी रिश्तों पर पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार आजकल लोगों की लाइफ में इतना स्ट्रेस है कि उन्हें छोटी-छोटी बातों पर तेज गुस्सा आ जाता है, जो बहुत बार गलत जगह फूट पड़ता है। कुल मिलाकर बिना सोचे-समझे किया जाने वाला गुस्सा आपके समाज के साथ रिश्तों पर तो असर डालता ही है, कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है।

नई दिल्ली
फैशन डिजाइनर रोहित बल ने शराब के नशे में पड़ोसी से की मारपीट, मामूली बात को लेकर बढ़ा विवाद
उत्तर प्रदेश
मामूली विवाद में हुई जमकर मारपीट, नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
वाराणसी मामूली विवाद में गई नाबालिग की जान

हमारी सांस्कृति में वसुधैव कुटुम्बकम जैसे संस्कार विद्यमान हैं। इसके बावजूद आज बदलती जीवनशैली के कारण हममें धैर्य की कमी हो रही है। इसके कारण हम अपने सगे-संबंधियों से ही नहीं, समाज से भी कट रहे हैं। कहां पहले एक गांव में रहने वाला व्यक्ति पूरे गांव के परिवारों के सदस्यों के बारे में ही नहीं, उनके रिश्तेदारों तक को जानता था। किंतु अब लोगों को पड़ोस में रहने वाले परिवार के बारे में भी पूरा पता नहीं होता है। रही-सही कसर हड़बड़ी वाले माहौल ने पूरी कर दी है। न जानने तक तो ठीक था, किंतु अब लोगों में इतना अधैर्य आ गया है कि पड़ोसी तो क्या घर में भी एक-दूसरे की बात बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। कहां पहले छोटा भाई बड़े भाई से आंख की शर्म महसूस करता था, यदि पड़ोस में कोई उम्र में बड़ा है, तो उससे भी इसी तरह का सदाचार भरा व्यवहार किया जाता था। आखिर एकाएक ऐसा क्या हो गया कि समाज में गुस्सा इतना बढ़ गया, जिसका असर रिश्तों पर भी पडऩे लगा?

ऐसे पड़ता है रिश्तों पर असर

दूसरों की नजर में छवि खराब ... जानकारों के अनुसार आपका गुस्सैल स्वभाव दूसरों की नजर में आपकी छवि खराब कर देता है। वे आपको नकचढ़ा मानने लगते हैं और जल्दी आपसे बात करने को राजी नहीं होते हैं।

लोगों से दूर कर सकता है... गुस्सा आपको दूसरे लोगों से ही नहीं, अपने लोगों से भी दूर कर देता है। घर में भी लोग आपसे घुलने-मिलने से परहेज करने लगते हैं।

इतना गुस्सा क्यों आता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार हम बहुत जल्दी में होते हैं, लेकिन सिच्युएशन ऐसी बन जाती है कि हम और लेट हो जाते हैं, ऐसे में गुस्सा आना स्वभाविक है। लेकिन गुस्सा करने से कुछ हासिल नहीं होगा। लगातार ये न सोचें कि आप लेट हो रहे हैं, इससे आपकी सोचने की शक्ति कम हो जाती है। बजाय इसके खुद को हालात का सामना करने के काबिल बनाएं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

मनोचिकित्सक नियति दीवान कहती हैं- कि आजकल लोगों की लाइफ में इतना स्ट्रेस है कि उन्हें छोटी-छोटी बातों पर तेज गुस्सा आ जाता है। दरअसल, इंसान के अंदर बहुत सी भावनाएं होती हैं, जिसे वह व्यक्त नहीं कर पाता। यही दबाया हुआ गुस्सा बाहर निकलकर गलत जगह फूट पड़ता है।
हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि बात मार-पिटाई तक आ जाती है। कुलमिलाकर बिना सोचे-समझे किया जाने वाला गुस्सा जानलेवा भी साबित हो रहा है।

सहनशक्ति की कमी

जिन लोगों में सहनशक्ति कम होती है उन्हें बेहद मामूली बात पर भी गुस्सा आ जाता है। इसके अलावा आजकल लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं और जब वे पूरी नहीं होतीं, तो वे आपा खो देते हैं।

तनावपूर्ण जीवनशैली

शहरी जीवनशैली ने लोगों की जिंदगी को जटिल और व्यस्त बना दिया है। बदले लाइफस्टाइल के कारण लोगों की प्राथमिकताएं बदली हैं। लोग सफलता की ऊंचाइयों तक जल्दी पहुंचना चाहते हैं और जब ऐसा नहीं हो पाता तो वे खीझ जाते हैं।

थोड़ा गुस्सा जरूरी है

गुस्सा किसी को भी आ सकता है, लेकिन सही समय पर, सही मकसद के लिए सही तरीके से गुस्सा करना हर किसी के वश की बात नहीं होती। मनोचिकित्सक डॉ. नियति दीवान के अनुसार ‘गुस्से को दबाना नहीं चाहिए, उसे जाहिर करना जरूरी है। $गुस्सा जाहिर करने के कई तरीके हैं, जैसे- आप यदि किसी सामाजिक मुद्दे को लेकर आंदोलन के जरिए गुस्सा जाहिर करते हैं, तो वो सामाजिक रूप से स्वीकार्य होगा, लेकिन अपना $गुस्सा उतारने के लिए यदि किसी को थप्पड़ जड़ देते हैं, तो इसे कोई बर्दाश्त नहीं करेगा।’

रिसर्च

नेशनल क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में होने वाली हत्याओं के पीछे गुस्सा एक सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है। 2014 में हुए हत्याओं के मामले में 21 फीसदी का कारण अचानक गुस्सा आना सामने आया है। जबकि 2013 में ये आंकड़ा मात्र 17 फीसदी था। हाल ही ब्रिटेन में हुई रिसर्च के अनुसार, एक आदमी महीने में औसतन 28 बार और साल में 336 बार गुस्सा करता है।