
Live In Relationship | जीनत अमान की फाइल फोटो | Credit- Patrika and Gemini AI
Zeenat Aman on Live In Relationship: अस्सी के दशक की हरदिल अजीज एक्ट्रेस जीनत अमान ने शुभ्रा अयप्पा के साथ बातचीत में कहा है कि आज के समय में लिव-इन रिलेशनशिप ज्यादा जरूरी है। साथ ही वे यह भी कहती हैं कि दुखभरी शादी से ज्यादा अच्छा है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहा जाए। इस तरह की सलाह के बाद 74 वर्षीय एक्ट्रेस अपनी बेबाकी के कारण एक बार फिर चर्चा में हैं।
जीनत अमान के तर्क के पीछे का मनोविज्ञान: कुछ घंटों के लिए डेट पर मिलना और 24 घंटे एक ही छत के नीचे रहना, दोनों में जमीन-आसमान का फर्क होता है। मनोवैज्ञानिक नजरिए से इसे 'कंपैटिबिलिटी टेस्टिंग' (Compatibility Testing) कहा जाता है।
रिलेशनशिप एक्सपर्ट भी सलाह देते हैं कि साथ रहने पर कपल को एक-दूसरे की वित्तीय आदतों (Financial habits), काम बांटने के तरीके, साफ-सफाई की आदतों और सबसे महत्वपूर्ण, तनाव या झगड़े के दौरान उनके व्यवहार (Conflict Resolution) का पता चलता है। यह असल जिंदगी का एक 'ट्रायल रन' होता है। इसलिए, शादी से पहले साथ रहना जरूरी माना जा सकता है।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दुनिया भर में कई समाजशास्त्रीय अध्ययन हुए हैं। विज्ञान की भाषा में इसे 'कोहैबिटेशन' (Cohabitation) कहा जाता है।
डेन्वर यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिकों (विशेषकर स्कॉट स्टेनली और गैलेना रोड्स) द्वारा 'स्लाइडिंग बनाम डिसाइडिंग' थ्योरी दी गई थी। इसमें बताया गया है कि जो कपल बिना किसी ठोस कमिटमेंट के सिर्फ सुविधा के लिए साथ रहने लगते हैं, उनके रिश्ते में आगे चलकर अलगाव का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक होता है, जो स्पष्ट निर्णय के साथ लिव-इन में जाते हैं।
इनशॉर्ट्स (Inshorts) ने मई 2018 में 'पल्स ऑफ द नेशन' नाम से एक व्यापक यूथ सर्वे किया था। इसमें लगभग 1.4 लाख भारतीयों (जिनमें 80% युवा 18-35 आयु वर्ग के थे) ने हिस्सा लिया था। सर्वे के अनुसार, 80% से अधिक लोगों (और 10 में से 8 महिलाओं) ने लिव-इन रिलेशनशिप का समर्थन किया था और लगभग 45% लोगों ने इसे शादी से पहले 'कंपैटिबिलिटी' (तालमेल) जांचने का एक अहम तरीका माना था।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कई ऐतिहासिक मामलों में लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता दी है। उदाहरण के लिए, 'एस. खुशबू बनाम कन्नियम्मल' (2010) और 'इंद्रा सरमा बनाम वी.के.वी. सरमा' (2013) मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों का आपसी सहमति से साथ रहना कोई अपराध नहीं है। इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) के तहत सुरक्षित माना गया है।
Updated on:
30 Jun 2026 06:12 pm
Published on:
30 Jun 2026 06:01 pm
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