
Om Puri
दिवंगत अभिनेता ओम पुरी की पहली पत्नी सीमा कपूर ने हाल ही ओम के साथ अपने रिश्ते पर खुल कर बातचीत की। एक इंटरव्यू में सीमा ने बताया कि 90 के दशक में जब मैंने प्रेम विवाह किया, तब यह आसान नहीं था। ओम पुरी मुझसे 10 साल बड़े थे और अभिनय की दुनिया में संघर्ष कर रहे थे। हमारा विवाह बमुश्किल एक साल चला। मुझे कदम-कदम पर धोखे मिले, पति की जिंदगी में दूसरी औरत आ गई। जब देखा कि नंदिता से उनका रिश्ता बहुत आगे बढ़ चुका है, तो उनका घर छोड़ दिया। तलाक के बाद अपनी मां के पास झालावाड़ में रहने लगी। घर वालों के कहने पर भी मैंने ओम पुरी के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं किया। उनसे प्रेम किया था। लोग मेरी ही पसंद को खराब कहते, जो मुझे मंजूर नहीं था। मीडिया में उनके बारे में कभी कुछ नहीं कहा, क्योंकि अपनों पर गंदगी उछालो, तो छींटे खुद पर ही आते हैं। संभलने में वक्त लगा, लेकिन फिर पूरा ध्यान कॅरियर पर केंद्रित किया।
बरसों के अकेलेपन से लगातार जूझते हुए भी मैंने नकारात्मकता को खुद पर हावी नहीं होने दिया। इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी अगर मैं मजबूती से खड़ी रही, तो यह मेडिटेशन की वजह से संभव हुआ। ओम जी से अलग होने के बाद एक बार मैं कार से झालावाड़ जा रही थी। रास्ते में एक जगह जंगल पड़ा। कार रुकवाकर मैं हरी-भरी प्रकृति के बीच उस जगह जाकर खड़ी हो गई, जहां एक झरना बह रहा था। एकदम से जैसे किसी ने मुझसे पूछा, तुम्हें क्या लगता है? ये सब जो हो रहा है, बस यूं ही हो रहा है या इसके कोई गहरे मतलब हैं? मुझे अंदर से जोर का धक्का लगा और मैं काफी देर तक फूट-फूट कर रोती रही। वे दुख या सुख के आंसू नहीं थे। खुद को महसूस कर पाने के आंसू थे। बाद में जाना कि उस जगह पर जाना-माना जैन तीर्थ-स्थल था। फिर मैं अध्यात्म से जुड़ी। नियमित मेडिटेशन ने मुझे पीड़ा से बाहर निकाला। मेरे तन-मन को कहीं ज्यादा स्वस्थ बना कर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ, जो अभी तक बरकरार है। इसके लिए मैं ओम जी की बहुत शुक्रगुजार हूं। न वे मुझे इतनी पीड़ा देते, न मैं ईश्वर और खुद से इतना जुड़ पाती।
ओम जी के आखिरी दिनों में मैं उनके साथ थी, लेकिन मेेरे अतीत ने मुझे जीना सिखा दिया। ओम जी की कमी को कोई नहीं भर सकता, लेकिन कला का सफर जारी है। मैं अपने जैसी तमाम महिलाओं को संदेश देना चाहती हूं कि किसी के छोड़ देने से जिंदगी रुक नहीं जाती। ईश्वर के पास हर परेशानी का हल है। कोई हमसे प्रेम करे या न करे, ईश्वर हमसे प्रेम करता है। हमें कभी अपनी अहमियत भूलनी नहीं चाहिए और अपनी जिंदगी संवारते रहना चाहिए। (जैसा उन्होंने मेधाविनी मोहन को बताया)
Published on:
27 Oct 2017 03:04 pm
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