
भोपाल। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को लेकर यूं तो कई मिसालें हैं। इनमें एक अनोखी मिसाल सरगुजा रियासत की है। आजादी के बाद भले ही ये जिला बन गया, लेकिन यहां का शाही परिवार और जनता अब भी रक्षा के इस पवित्र बंधन से बंधे हैं। आज भी रियासत की जनता शाही परिवार को राखी बांधने की परंपरा निभाती है। इसके बदले शाही परिवार के सदस्य प्रजा को रक्षा का वचन देते हैं। यह रिवाज सदियों से चला आ रहा है।
बचपन में बहन को शगुन के रूप में देते थे ग्यारह रुपए
भोपाल में रह रहे अरुणेश्वर सरन सिंह देव (बाबा साहब) अविभाजित मध्यप्रदेश के सरगुजा रियासत में बिताए दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि मैं अपनी फैमिली में सबसे छोटा था, मुझे कम खर्च में ज्यादा फायदा पाने का लालच था। इसलिए मैं अपनी बड़ी बहनों को राखी बांधने के बाद शगुन के रूप में 11 रुपए देता था। इसके बाद भी मुझे अच्छे-अच्छे GIFT मिल जाते थे।
116वीं पीढ़ी निभा रही है ये परंपरा
अरुणेश्वर सरन सिंह देव छत्तीसगढ़ के सरगुजा रियासत के राजा स्वर्गीय एमएस सिंह देव के पुत्र हैं। वे बताते हैं कि हम रियासत की 116वीं पीढ़ी हैं। पूरा परिवार आज भी सदियों से चली आ रही इस परंपरा को बखूबी निभा रहा है। मां देवेंद्र कुमार सिंह देव सरगुजा में राजमाता हैं। इस रॉयल फैमिली में सभी सदस्य अपने से बड़ों को राखी बांधते आ रहे हैं।
बेटे-बेटी के साथ करते हैं सेलिब्रेट
बाबा साहब और वाइफ सपना सिंह देव अपने बेटे आदित्येश्वर और बेटी ऐश्वर्या के साथ हर साल भोपाल में रखी के पवित्र त्यौहार को सेलिब्रेट करते हैं। जब भी समय मिलता है, तो मां के पास दिल्ली चले जाते हैं।
बहनें बाय पोस्ट भेजती हैं राखी
अरुणेश्वर सिंह देव को लोग प्यार से बाबा साहब भी कहते हैं। बड़े भाई त्रिभुवनेश्वर सिंह देव छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। उनकी बड़ी बहन मोहिनी राणा नेपाल में एक स्कूल की प्रिंसिपल हैं। दूसरी बहन आशा कुमारी हिमाचल में एमएलए हैं। जबकि तीसरी सिस्टर मंजूश्री आनंद पानीपत में रहती हैं। व्यस्त और दूर होने के कारण वे हर साल भोपाल नहीं आ पातीं, इसलिए बाय-पोस्ट राखी भेजती हैं, लेकिन हर तीन साल में पूरी फैमिली भोपाल या दिल्ली में राखी सेलिब्रेट करती है।
Published on:
07 Aug 2017 10:41 am
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