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Chaiti Chhath 2026: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक… जानें 36 घंटे के निर्जला व्रत की तिथियां और महत्व

Chaiti Chhath 2026: भारत की पारंपरिक आस्था और सनातन संस्कृति में छठ महापर्व का विशेष महत्व माना जाता है।यह चार दिनों तक चलने वाला कठोर व्रत होता है, जिसमें व्रती पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा करते हैं।

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भारत

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MEGHA ROY

Mar 12, 2026

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Chhath Puja News Update|फोटो सोर्स- Freepik

Chaiti Chhath 2026 Kab Hai: चैती छठ सूर्य उपासना का अत्यंत पवित्र और कठिन व्रत माना जाता है, जिसमें श्रद्धालु 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह पर्व केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि ही नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक भी है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं, जिसके बाद 22 मार्च से चैती छठ की शुरुआत होगी। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इस पावन व्रत की तिथियां और धार्मिक महत्व।

संतान सुख और मनोकामना पूर्ति का पर्व

छठ महापर्व को संतान सुख, परिवार की समृद्धि और मनोकामना पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ यह व्रत करते हैं, सूर्य देव उनकी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

नहाय-खाय से होती है व्रत की शुरुआत

छठ महापर्व का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। वर्ष 2026 में यह 22 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती सुबह पवित्र नदी या तालाब में स्नान करते हैं और घर में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। स्नान के बाद व्रती सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें सामान्यतः कद्दू-भात और दाल बनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य शरीर और मन को व्रत के लिए तैयार करना होता है।

खरना: 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत

महापर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है, जो 23 मार्च 2026 को पड़ेगा। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं। शाम के समय छठी मैया को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद व्रती इसी प्रसाद को ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जिसमें पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता।

संध्या अर्घ्य: अस्त होते सूर्य की पूजा

छठ पर्व का तीसरा दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है। 24 मार्च 2026 को व्रती डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। इस दिन शाम के समय नदी, तालाब या घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। व्रती पारंपरिक सूप में फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद सजाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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