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Chaitra Navratra : 08th Day- राहु को नियंत्रित करने वाली माता गौरी कर देतीं हैं पूर्वसंचित पापों को नष्ट

माता महा गौरी को प्रसन्न करने के उपाय, पूजा विधि और स्वरूप

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Deepesh Tiwari

Apr 05, 2022

Day 08 of chaitra Navratra  2022

Day 08 of chaitra Navratra 2022

08th Day of Chaitra Navratra 2022 : नवरात्र में देवी मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अत्यंत खास मानी जाती है। शक्ति की पूजा के इस पर्व के आठवें दिन देवी मां के आठवें रूप महागौरी का पूजन किया जाता है। ऐसे में इस बार चैत्र नवरात्र 2022 में चैत्र अष्टमी यानि माता महागौरी का शनिवार के दिन 09 अप्रैल को विधि विधान से पूजन किया जाएगा।

माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से जिस भी भक्तों के द्वारा माता महागौरी की प्रार्थना की जाती है मां उसे अवश्य स्वीकर करती हैं। वहीं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी महागौरी द्वारा ही राहु ग्रह को नियंत्रित किया जाता हैं। ऐसे में देवी महागौरी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं।महागौरी का अर्थ, महा मतलब महान/बड़ा और गौरी मतलब गोरी। देवी का रंग गोरा होने के कारण ही उन्हें महागौरी कहा गया।

चैत्र नवरात्र 2022 अष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त ...
अष्टमी तिथि का प्रारंभ: शुक्रवार 9 अप्रैल को 01:23 AM से
अष्टमी तिथि का समापन : शनिवार 10 अप्रैल को 03:15 AM पर होगा।
इसके अलवा इस दिन अभिजीत मुहूर्त 11:35 AM से 12:25 PM तक रहेगा।

चैत्र अष्टमी के दिन भी देवी दुर्गा का पूजन विधान ठीक चैत्र सप्तमी की तरह ही होता है। लेकिन इस दिन प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जाती है, हां इस दिन सुबह से ही कन्या पूजन किया जा सकता है। इस दिन मां दुर्गा का षोडशोपचार पूजन किया जाता है। इस दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है।

शास्त्रानुसार Goddess sati नवरात्र अष्टमी पर महागौरी की पूजा अर्चना का विधान है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी कलंक धुल जाते हैं, साथ ही पूर्व में संचित पापों का भी नाश हो जाता है। इसके अलावा भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दुःख भी उसके पास कभी नहीं आते। माना जाता है कि मां महागौरी की अराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और देवी का भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है।

माता महागौरी
देवी महागौरी की चार भुजाएं होने के अलावा यह वृषभ की सवारी करती हैं। इनका एक दाहिना हाथ अभय मुद्रा धारण में है, जबकि दूसरे दाहिने हाथ में त्रिशूल विद्यमान है। इसके अलावा एक बायें हाथ में डमरू और दूसरा बायां हाथ वर मुद्रा में है।

माता महागौरी : पौराणिक मान्यताएं
पौराणिक मान्याताओं के अनुसार देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए गर्मी, सर्दी और बरसात का बिना परवाह किए कठोर तप किया था, जिसके कारण उनका रंग काला हो गया था। उसके बाद शिव जी उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए और गंगा के पवित्र जल से उन्हें स्नान कराया, जिसके पश्चात देवी का रंग पुन: गोरा हो गया। तब से उन्हें महागौरी कहा जाने लगा।

कन्या पूजन विधि (Kanya pujan)
नवरात्रि में कन्या पूजन अष्टमी व नवमी दोनों दिन किया जाता है। इस दौरान 10 साल से कम उम्र की कन्याओं को देवी मानकर उनकी पूजा की जाती है। शास्त्रों के मुताबिक कन्या पूजन के लिए एक दिन पहले कन्याओं को निमंत्रण दिया जाता है। कन्या के घर में पधारने पर उनके पैरों को धोया जाता है। जिसके बाद उन्हें उचित स्थान पर बैठाया जाता है। इसके पश्चात कन्याओं के माथे पर अक्षत और कुमकुम लगाकर मां दुर्गा का ध्यान करके देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराना चाहिए। भोजन के बाद कन्याओं को सामर्थ्य के मुताबिक दक्षिणा या उपहार देने के पश्चात उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए।

रामनवमी भी रविवार,10 अप्रैल 2022 को-
वहीं इस बार रामनवमी का पर्व रविवार,10 अप्रैल 2022 केा मनाया जाएगा। और इसी दिन नवरात्रि की नवमी के तहत मां सिद्धिदात्री की पूजा भी की जाएगी। मां सिद्धिदात्री की पूजा के तहत जहां इस दिन की शुरुआत भी महास्नान और षोडशोपचार पूजा से होगी। वहीं इस दिन दुर्गासप्तशती के नवें अध्याय के साथ मां सिद्धिदात्री की पूजन करना चाहिए। इस दिन मौसमी फल, हलवा-चना, पूड़ी, खीर और नारियल का भोग लगाया जाता है।

नवरात्र के अंतिम दिन देवी मां के प्रसन्न होने से भाग्य का उदय भी होता है। इस दिन कुछ लेागों के अनुसार बैंगन या जामुनी रंग पहनना शुभ माना जाता है, इसका कारण इस रंग के अध्यात्म का प्रतीक होने से जोड़ा जाता है।

मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धी और मोक्ष को देने वाली हैं। मां सिद्धिदात्री की पूजा देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक और गृहस्थ आश्रम में जीवनयापन करने वाले पूजा करते हैं। नवरात्र के अंतिम दिन मां की पूजा पूरे विधि विधान के साथ करने वाले उपासक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। साथ ही यश, बल और धन की भी प्राप्ति होती है।

वहीं चैत्र नवरात्रि की नवमी को भगवान श्रीराम के जन्म के रूप में भी जाना जाता है। ऐसे में इस दिन भगवान श्री राम की पूजा भी इस दिन की जाती है।

भगवान श्रीराम के पूजन के तहत इस दिन यानि चैत्र शुक्ल पक्ष के नवमी के दिन - रामनवमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। जिसके पश्चात भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की मूर्तियों का रोली से तिलक करने के बाद भगवान श्री राम को चावल, फूल चढ़ाकर और घंटी और शंख बजाने के बाद भगवान श्री राम का विधि विधान से पूजन करना चाहिए।

इस दौरान श्री राम के मंत्रों का जाप के अलावा रामायण के अलावा रामचरितमानस का भी पाठ करना विशेष माना जाता है। वहीं सबसे आखिर में आरती करें। माना जाता है कि इस दिन भगवान श्रीराम को झूला झूलने के अलावा किसी गरीब या ब्राह्मण को गेहूं और बाजरा दान भी करना चाहिए।

भगवान श्रीराम की पूजा का शुभ मुहूर्त : रविवार, 10 अप्रैल को नवमी तिथि सुबह 03:15 मिनट से शुरु होगी, जो सोमवार, 11 अप्रैल को सुबह 04:30 बजे तक रहेगी। वहीं भगवान श्री राम की पूजा का शुभ मुहूर्त रविवार,10 अप्रैल 2022 को सुबह 11 बजकर 10 मिनट से दोपहर 01 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।

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