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Chaitra Navratri 2026 Day 4: मां कुष्मांडा की कृपा पाने का खास दिन, पूजा विधि से लेकर शुभ रंग तक सब कुछ जानें

Chaitra Navratri 2025 Day 4: चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित होता है, जिन्हें सृष्टि की आदि शक्ति माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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भारत

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MEGHA ROY

Mar 21, 2026

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Maa Kushmanda Puja Vidhi|फोटो सोर्स- Freepik

Chaitra Navratri 2026 Day 4: चैत्र नवरात्रि 2026 का चौथा दिन मां कुष्मांडा की पूजा को समर्पित होता है, जिन्हें सृष्टि की रचयिता देवी माना जाता है। मान्यता है कि अपनी हल्की मुस्कान से उन्होंने पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति की, इसलिए उनका विशेष महत्व है। इस दिन भक्त मां की विधि-विधान से पूजा कर सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं।मां कुष्मांडा अष्टभुजा रूप में सिंह पर विराजमान होती हैं और अनाहत चक्र की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं, जो जीवन में ऊर्जा और संतुलन प्रदान करती हैं। नवरात्रि के चौथे दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, जो उत्साह और प्रसन्नता का प्रतीक है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, पूजा विधि और शुभ रंग से जुड़ी खास बातें।

शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय


चैत्र नवरात्रि 2026 में मां कुष्मांडा की पूजा उदया तिथि के अनुसार 22 मार्च, रविवार को की जाएगी, जबकि चतुर्थी तिथि 21 मार्च की रात से ही आरंभ हो जाएगी। पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है। विशेष रूप से सूर्योदय के बाद सुबह 6:20 बजे से लेकर 10:00 बजे तक का समय बेहद शुभ रहेगा।

पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ कर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और चंदन, अक्षत, सिंदूर और पुष्प अर्पित करें।मां कूष्मांडा को विशेष रूप से सुगंधित फूलों की माला, मौसमी फल और मिठाई अर्पित की जाती है। भोग में मालपुआ चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है, जो सुख-समृद्धि का प्रतीक है। पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें और अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।

चौथे दिन का शुभ रंग पीला

नवरात्रि के चौथे दिन पीला रंग बेहद शुभ माना जाता है। यह रंग खुशी, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक है। इसे धारण करने से मन प्रसन्न रहता है और पूरे दिन ऊर्जा बनी रहती है। पीला रंग आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक संतुलन को भी दर्शाता है।

मंत्र और प्रार्थना का महत्व

पूजा के दौरान मंत्र जाप से साधना और भी प्रभावी हो जाती है।इन मंत्रों का श्रद्धा से जाप करने से मन की शांति और देवी की कृपा प्राप्त होती है।

पूजा मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

प्रार्थना

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्मभ्यं कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥

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